भवानीमंडी एडीजे राजीव दत्तात्रेय ने पति की हत्या के मामले में दोषी मानते हुए पत्नी और प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रेमी ने पहले तो पति के सिर पर हथौड़े से वार किया, नहीं मरने पर हीटर के तार हाथ पर बांधकर करंट लगाया था। दोनों पर सबूत मिटाने पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। ग्राफिक्स से समझिए पूरा घटनाक्रम चारपाई पर लहूलुहान हालत में मिला था शव अपर लोक अभियोजक हेमराज शर्मा ने बताया- 17 सितंबर 2024 की रात सांगरिया गांव निवासी शिवराज सिंह राजपूत (32) पुत्र धनसिंह की हत्या का मामला सामने आया था। सुबह करीब 6 बजे बेटी को शिवराज चारपाई पर लहूलुहान हालत में मिले थे। पिता के सिर से खून बह रहा था। हाथ में हीटर की स्प्रिंग लिपटी हुई थी। मामले में शिवराज के भाई नरेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। बेटी ने बताया था- कमरे में खून था, मां पोछा लगा रही थी रिपोर्ट के अनुसार बेटी ने बताया था कि उसकी मां ने रात में पिता शिवराज, छोटे भाई और मुझे दूध पिलाकर सुलाया था। जब रात के समय उसकी आंख खुली तो देखा कि पिता वाले कमरे में खून के छीटें पड़ें हुए हैं, मां पोछा लगा रही थी। लेकिन मैं नजरअंदाज कर सो गई। सुबह उठी तो पिता कहीं नजर नहीं आए। पिता को खोजते हुए पास के कमरे में गई तो उनकी लाश दिखी। शोर मचाने पर बाकी घरवाले भी मौके पर पहुंचे। हाथों में हीटर के तार बांधकर करंट लगाया पुलिस जांच में सामने आया कि रात के समय पत्नी किरण ने अपने प्रेमी सुरेंद्र सिंह को घर बुलाया। दोनों घर के पास बने बाड़े में थे, पति शिवराज ने दोनों को देख लिया था। दोनों डर गए। प्रेमी सुरेंद्र शिवराज के पास कमरे में गया, वहां दोनों के बीच झगड़ा हो गया। इसी दौरान सुरेंद्र ने पास में पड़े हथौड़े से शिवराज के सिर पर वार कर दिया। जब वह नहीं मरा तो उसके हाथों में हीटर के तार बांधकर करंट लगाया। करंट और हमले में घायल होने से उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद से प्रेमी सुरेंद्र गांव से फरार था। पूछताछ के बाद शक हुआ तो पत्नी किरण को 19 सितंबर को हिरासत में लिया। किरण से मिली जानकारी के आधार पर सुरेंद्र को भी पकड़ लिया। 23 गवाहों के बयान दर्ज हुए मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में कुल 23 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। इसके अलावा, 65 दस्तावेज और 8 आर्टिकल भी सबूत के तौर पर पेश किए गए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई और सबूतों के आधार पर आरोपी पत्नी किरण कुंवर और गांव के ही उसके प्रेमी सुरेंद्र सिंह उर्फ सुंदर सिंह को दोषी माना। सबूत मिटाने के मामले में दोनों आरोपियों पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।