भीलवाड़ा में 83 लाख रुपए के बीमा क्लेम के लिए मरने के बाद भी युवक के शव को करंट लगाया गया। शव की अंगुलियों को जलाया गया। मामला संदिग्ध लगने पर पुलिस ने जांच की तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पुलिस ने 4 लोगों को हिरासत में ले लिया। गांधीनगर थाना प्रभारी पुष्पा कासोटिया ने बताया कि उन्हें 7 मई की रात को मांडल थाने से सब इंस्पेक्टर का कॉल आया था कि मांडल क्षेत्र से एक संदिग्ध शव अस्पताल लाया गया है। अस्पताल पहुंचने पर वहां एक बुजुर्ग महिला चंपाबेन मिली, जिसके बेटे दीपक (36) की मौत हुई थी। महिला ने बताया वह अहमदाबाद जिले के नरोदा गांव की रहने वाली है। महिला ने बताया कि 3-4 लोगों ने उसे कहा था कि वे उसके बेटे का प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाएंगे और इसी बहाने उसे यहां लेकर आए थे। रात होने के कारण वे लोग भीलवाड़ा के मालोला गांव में डालू गाडरी के घर में रुके थे। कुछ देर बाद साथ आए लोग खाना खाने चले गए। इसी दौरान बेटे दीपक की मौत हो गई। जब उन लोगों को फोन किया तो वे आए और उसे कमरे के बाहर बैठा दिया। महिला ने पुलिस को बताया कि उन लोगों ने कहा कि मौत को हादसा बता देते हैं और अस्पताल ले चलते हैं। इसके बाद उन्होंने करंट से मौत का मामला दिखाने के लिए दीपक के पैर के अंगूठे और हाथ की एक अंगुली को जला दिया। बाद में अस्पताल में सूचना दी गई कि दीपक खेत पर काम करते समय करंट लगने से झुलस गया था। डॉक्टर बोले- बॉडी देखते ही शक हो गया था मांडल अस्पताल में डॉ. रोहित सहरावत ने जब शव देखा तो उन्हें शक हुआ, क्योंकि करंट के निशान इस तरह के नहीं हो सकते थे। उन्होंने दीपक के सीने पर ईसीजी के लिए लगाए जाने वाले इलेक्ट्रोड्स के निशान भी देखे। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने 4 लोगों को पकड़ा पुलिस के पहुंचने से पहले दीपक के साथ आए लोग उसकी मां और बेटे को छोड़कर भाग गए थे। दीपक के 14 साल के बेटे ने पुलिस को बताया कि विशाल, सूरज और अर्जुन नाम के लोग उन्हें यहां लेकर आए थे, जबकि गाड़ी चलाने वाले का नाम भरत भाई था। पुलिस ने बच्चे से मिले मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर गंगरार टोल नाके से 4 लोगों को हिरासत में लिया गया। बेटा बोला- पापा को करंट लगाया गया मृतक दीपक के बेटे ने बताया कि पहले उसके पिता को अहमदाबाद के जीपीएस अस्पताल ले जाया गया, जहां आधार कार्ड मांगा गया। इसके बाद उन्हें वहां से निकालकर एक निजी डॉक्टर चिराग भाई के पास ले जाया गया। डॉक्टर ने कहा कि उसके पिता ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाएंगे और रात भी नहीं निकाल पाएंगे। दीपक के बेटे ने आरोप लगाया कि इसके बाद उन लोगों ने परिवार को कहा कि किसी को यह नहीं बताना कि मौत बीमारी से हुई है। उनसे कहा गया कि बताना कि उसके पिता खेत में काम करते थे और करंट लगने से मौत हुई है। उसके पिता के हाथ, पेट और अंगुली को जलाया गया। अंगुली से खून निकालने की भी कोशिश की गई। जब शरीर से खून नहीं निकला तो सीने को दबाकर खून निकाला गया। शराब पीने के लिए हर महीने 3 हजार रुपए देते थे दीपक की मां ने बताया सूरज और विशाल गुजरात में विशेष रूप से ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे, जो शराबी, गंभीर बीमारी से पीड़ित या आर्थिक रूप से कमजोर हों। उन्हें शराब की लत लगाकर हर महीने शराब पीने के लिए 3 हजार रुपए दिए जाते थे। बीमा की किस्त भी यही लोग जमा करवाते थे। पत्नी की मौत के सदमे में आए दीपक को भी शराब की लत लग गई थी। करीब पांच महीने तक उसे हर महीने 3-3 हजार रुपए दिए गए, बाद में बंद कर दिए गए। शराब पीने से उसकी किडनी खराब हो गई थी। जब डॉक्टर यह जवाब दे देते कि व्यक्ति ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रहेगा, तब गिरोह सक्रिय हो जाता था। इसके बाद उस व्यक्ति को परिजनों सहित राजस्थान या अन्य क्षेत्रों में किसी किसान के यहां रखवाली या मजदूरी के नाम पर भेज दिया जाता था। एक साल पहले भी कराया था बीमा दीपक के बेटे ने बताया कि एक साल पहले भी इन लोगों ने पापा का बीमा कराया गया था, लेकिन बीमा अवधि के दौरान उसकी मौत नहीं हुई। इसके बाद करीब डेढ़-दो महीने पहले पापा की हालत गंभीर होने पर दोबारा बीमा करवाया गया। दादी को झांसा दिया गया कि दीपक की मौत होने पर करीब 4 लाख रुपए मिलेंगे, जबकि राजस्थान ले जाने पर करीब 5 लाख रुपए दिलवाए जाएंगे। दीपक के नाम पर करीब 83 लाख रुपए के चार अलग-अलग बीमा थे। दीपक ने दावा किया कि उनके गांव में इस गिरोह ने करीब 71 लोगों के इसी तरह बीमा कर रखे हैं। राकेश सांसी नाम का युवक इन लोगों के लिए शराब उपलब्ध करवाता था और भीलवाड़ा में मजदूरी के नाम पर संपर्क करवाता था। एसपी बोले- गिरोह सक्रिय होने की आशंका भीलवाड़ा एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, बीमा दस्तावेज, कॉल डिटेल की जांच की जाएगी। आशंका है कि इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है। इस नेटवर्क में बीमा एजेंट, सर्वेयर और अन्य लोगों की मिलीभगत भी हो सकती है। परिजन लाचार, आर्थिक ‎मदद से शव ले जाना पड़ा‎ दीपक का शव गुजरात भिजवाने के लिए 16 हजार रुपए की जरूरत थी, लेकिन घरवालों के पास पैसे नहीं थे। इस पर मांडल विधायक उदयलाल भडाणा ने गाड़ी की व्यवस्था की। सीआई पुष्पा कासोटिया, पुलिसकर्मियों ने भी आर्थिक सहायता दी।