ओडिशा के पुरीधाम की विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा गुरुवार को भीलवाड़ा में भी पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ निभाई गई। शहर में भगवान जगन्नाथ की दो अलग-अलग रथयात्राएं निकाली गईं। कावांखेड़ा स्थित जगन्नाथ मंदिर से शाम 4 बजे 24वीं रथयात्रा रवाना हुई, जबकि अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) की 10वीं रथयात्रा शाम 5 बजे लक्ष्मीनारायण मंदिर से शुरू हुई। यात्रा के दौरान 'तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले' और भगवान जगन्नाथ के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा। श्रद्धालुओं में रथ की पवित्र रस्सी पकड़कर रथ खींचने की होड़ देखने को मिली। कावांखेड़ा से निकली रथयात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई हरीसेवा धाम पहुंची। यहां भगवान जगन्नाथ, बलदेव और देवी सुभद्रा आठ दिनों तक मौसी घर में विराजेंगे और 25 जुलाई को पुनः अपने निजधाम लौटेंगे। दोनों यात्राओं में भगवान जगन्नाथ, बलदेव और देवी सुभद्रा सुसज्जित लकड़ी के रथ में विराजे और श्रद्धालुओं ने पूरे भक्ति भाव से रथ खींचकर दर्शन किए। 2003 में शुरू हुई परंपरा, 2015 से नक्काशीदार रथ में नगर भ्रमण मंदिर के पंडित प्रभुदयाल ने बताया कि वर्ष 2003 में जयपुर में निर्मित संगमरमर की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ रथयात्रा की शुरुआत हुई थी। शुरुआत में रथयात्रा बैलगाड़ी से निकाली जाती थी, बाद में श्रद्धालु स्वयं रथ खींचने लगे। इसके बाद पुरीधाम से भगवान जगन्नाथ, बलदेव और देवी सुभद्रा के लकड़ी के विग्रह मंगवाए गए। वर्ष 2015 से उदयपुर में तैयार नक्काशीदार लकड़ी के रथ में भगवान जगन्नाथ, बलदेव और देवी सुभद्रा विराजकर नगर भ्रमण कर रहे हैं। फूल बरसाकर किया स्वागत, हरिनाम संकीर्तन से गूंजे रास्ते इस्कॉन की रथयात्रा लक्ष्मीनारायण मंदिर से शुरू होकर मुरलीविलास रोड, रेलवे स्टेशन, गोलप्याऊ, बालाजी मार्केट, महावीर पार्क, कॉलेज रोड, गुरुद्वारा रोड और बड़ला चौराहा होते हुए अग्रसेन भवन पहुंची। पूरे रास्ते हरे कृष्णा... हरे कृष्णा... कृष्णा कृष्णा... हरे हरे के हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और भगवान जगन्नाथ के जयकारे गूंजते रहे। युवा भक्ति में झूमते नजर आए, जबकि कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर रथयात्रा का स्वागत किया। महाप्रसाद वितरण के साथ भक्तिमय माहौल यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में कीर्तन मंडलियां और श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे मार्ग में महाप्रसाद का वितरण किया गया। भक्तों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान के दर्शन किए और रथ की पवित्र रस्सी खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए उत्साह दिखाया। पूरे शहर में दिनभर भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का माहौल बना रहा। देखिए… संबंधित अन्य तस्वीरें