भीलवाड़ा में कोयला भट्टी कांड में लापरवाही के मामले में तत्कालीन पटवारी को बर्खास्त करने के बाद तबीयत बिगड़ गई। कार्रवाई के बाद वीडियो पोस्ट कर कहा- जांच में तहसील और उपखंड प्रशासन ने उन्हें क्लीन चिट दी थी, लेकिन फिर भी बिना ठोस आधार के उनकी नौकरी छीन ली गई। मैंने बस आत्महत्या ही नहीं की, बाकी सब कुछ झेल लिया। राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ ने इस कार्रवाई को एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताया है। कहा है - अगर प्रशासन ने अपने फैसले पर दोबारा विचार नहीं किया तो बुधवार से जिलेभर के पटवारी और कानूनगो पूर्ण कार्य बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ जाएंगे। 2023 के कोयला भट्टी कांड में तीन साल बाद बड़ी कार्रवाई भीलवाड़ा में 2 अगस्त 2023 को कोयला भट्टी कांड हुआ था। करीब तीन साल बाद पटवारी हरदेव बैरवा को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया। 22 जुलाई 2026 को जारी इस आदेश के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया। पटवारी बोले- जांच में निर्दोष बताया, फिर भी नौकरी छीन ली बर्खास्त किए गए पटवारी हरदेव बैरवा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि घटना के बाद सभी वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। अतिक्रमण भी हटा दिया गया था और उन्हें 14 अगस्त तक धारा 91 के तहत रिपोर्ट देनी थी। उनका दावा है कि तहसील और उपखंड प्रशासन ने जांच में उन्हें निर्दोष माना था, लेकिन इसके बावजूद उनकी नौकरी खत्म कर दी गई। उन्होंने कहा- बस आत्महत्या ही नहीं की, बाकी सब कुछ झेल लिया। हार्ट अटैक के बाद मिली नई पोस्टिंग, दो महीने में ही बर्खास्तगी पटवारी ने बताया कि घटना के बाद 13 दिसंबर 2025 को उन्हें हार्ट अटैक आया था और उदयपुर में स्टेंट डलवाना पड़ा। तबीयत ठीक होने पर 1 जून 2026 को उनकी नई पोस्टिंग हुई, लेकिन दो महीने भी पूरे नहीं हुए कि उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। 23 जुलाई को बर्खास्तगी की जानकारी मिलने के बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई। फैसले के विरोध में उतरे पटवारी और कानूनगो राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ ने इस कार्रवाई को एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताया है। कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान ने भी पटवारी का समर्थन किया है। संघ की आपात बैठक में फैसला लिया गया कि सोमवार, 27 जुलाई को जिले के सभी उपखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर उपखंड अधिकारियों के माध्यम से जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। चेतावनी- फैसला नहीं बदला तो बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल संघ ने साफ कहा है कि अगर प्रशासन ने अपने फैसले पर दोबारा विचार नहीं किया तो बुधवार से जिलेभर के पटवारी और कानूनगो पूर्ण कार्य बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ जाएंगे। संघ का कहना है कि इससे आम लोगों को होने वाली परेशानी और राजस्व कार्य प्रभावित होने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।