भीलवाड़ा में जिला निजी स्कूल संघर्ष समिति के बैनर तले आज बुधवार को जिले के लगभग सभी प्राइवेट स्कूल बंद रहे। प्राइवेट स्कूल संचालकों ने राज्य सरकार की कथित दमनकारी नीतियों और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) पुनर्भुगतान से जुड़ी समस्याओं के विरोध में एक दिवसीय सांकेतिक आंदोलन किया। इस दौरान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को 13-सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी 10 दिनों में इन जायज़ मांगों का सकारात्मक निस्तारण नहीं किया गया, तो राजस्थान के सभी निजी स्कूल एक बड़े और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। संघर्ष समिति की मुख्य मांगों में शिक्षा संबलन निरीक्षण व्यवस्था को तुरंत निरस्त करना, आरटीई के तहत सत्र 2018 से 2021 (कोविड काल सहित) के बकाए भुगतानों को बिना किसी शर्त जारी करना और आरटीई यूनिट कॉस्ट में हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि करना शामिल है। इसके अलावा, स्कूलों ने बार-बार होने वाले औचक निरीक्षणों के नाम पर हो रही प्रताड़ना को बंद करने और प्री-प्राइमरी कक्षाओं के भुगतान को तुरंत शुरू करने की मांग भी उठाई है। 24 और 48 बिंदुओं पर जांच करना गलत प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आज हम सभी प्राइवेट स्कूलों के संचालक यहां इकट्ठा हुए हैं, पूरे राजस्थान में हमारा अभियान चल रहा है। इसी के तहत आज पूरे भीलवाड़ा जिले में सभी प्राइवेट स्कूल बंद हैं। सरकार ने 'राज संबलन' ऐप निकाला है, जिसमें प्राइवेट स्कूलों की 24 और 48 बिंदुओं पर जांच होगी, जो सही नहीं है। प्राइवेट स्कूलों और सरकारी स्कूलों, दोनों की जांच के बिंदु अलग-अलग हैं। प्राइवेट स्कूलों पर अतिरिक्त जांच थोपी जा रही है, हम इस अतिरिक्त जांच का विरोध कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि जिस प्रकार सरकारी स्कूलों की नीति (पॉलिसी) है, उसी नीति के तहत प्राइवेट स्कूल भी चलें। जब शिक्षा और शिक्षा प्रणाली (एजुकेशन सिस्टम) पूरे भारत में एक है, तो भारत में प्राइवेट और सरकारी दोनों के लिए अलग-अलग नियम क्यों बनाए जा रहे हैं? समाधान नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन करेंगे उन्होंने आगे कहा कि दूसरा मामला आरटीई से जुड़ा है। जो कानून विधानसभा और लोकसभा में पारित हुआ, उसमें अधिकारी छेड़छाड़ करके अनैतिक रूप से हम प्राइवेट स्कूलों पर दबाव बना रहे हैं, जो कि गलत है। पहले आरटीई और पाठ्यपुस्तकों का भुगतान सरकार करती थी, अब सरकार कह रही है कि यह भुगतान आप (स्कूल संचालक) करेंगे, जो कि गलत है। पहले किस कानून के आधार पर भुगतान किया जा रहा था और अब किस कानून के आधार पर हमें भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है? यह नियमों में स्पष्ट विरोधाभास है। इसी तरह के कुल 13 बिंदुओं को लेकर आज हम प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए हैं। आज ज्ञापन देकर 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है, यदि समाधान नहीं हुआ तो हम उग्र आंदोलन करेंगे। इनकी रही मौजूदगी इस दौरान राजस्थान प्राइवेट एजुकेशन महासंघ के अध्यक्ष पंकज प्रजापत, एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल के अध्यक्ष राजीव जैन और भीलवाड़ा जिला निजी शिक्षण संस्थान के जिलाध्यक्ष अर्जुन देवलिया सहित कई शिक्षाविद् और स्कूल संचालक उपस्थित रहे।