डीग जिले के कामवन (कामां) विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भोरी में विकास के दावे जमीनी हकीकत से दूर नजर आ रहे हैं। यहां के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। ग्राम भोरी का मुख्य मार्ग पिछले 7 साल से दलदल और जलभराव की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, इस रास्ते से गुजरना जोखिम भरा है, जहां आए दिन बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर फिसलकर चोटिल हो जाते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि सरपंच और सचिव को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्कूली बच्चों को होती है खासा परेशानी
इसी मार्ग के समीप एक इंग्लिश मीडियम सरकारी स्कूल स्थित है। स्कूल जाने वाले बच्चों को दलदल से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे वे अक्सर गिरकर चोटिल हो जाते हैं और उनकी स्कूल ड्रेस खराब हो जाती है। अभिभावकों ने इस स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में इस रास्ते पर लगभग 2 फीट तक पानी भर जाता है। इससे गंदगी और कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है। गांव में अब तक कोई विशेष साफ-सफाई अभियान भी नहीं चलाया गया है। खल्लुका गांव में 1 किमी दूर से पानी लाने की मजबूरी
उधर, पंचायत के दूसरे गांव खल्लुका की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां चंबल पेयजल लाइन बिछाए जाने के बावजूद घरों तक पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई है। ग्रामीणों के अनुसार, महिलाएं लगभग एक किलोमीटर दूर से सिर पर पानी ढोने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी विकट है कि लोगों को हरियाणा सीमा से 800 रुपये में पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। स्कूल की हालत भी जर्जर
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि चंबल लाइन बिछाने के दौरान गांव की सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जिन्हें अब तक दुरुस्त नहीं किया गया है। इसके अलावा गांव के स्कूल की हालत भी जर्जर है। यह स्कूल केवल 5वीं कक्षा तक संचालित होता है, और इसकी टूटी दीवारें तथा चारों ओर उगी कटीली झाड़ियां बच्चों के लिए खतरा पैदा करती हैं। ग्रामीणों ने स्कूल में चारदीवारी निर्माण और नियमित साफ-सफाई की मांग की है। 'जलभराव निकासी की समस्या पर नहीं बन पाई सहमति'
वहीं जब इस मामले में सरपंच पक्ष से बात करने की कोशिश की गई तो उसके भाई आशु ने बताया कि गांव में विकास कार्य कराए गए हैं।
जलभराव निकासी की समस्या को लेकर ग्रामीणों में सहमति नहीं बन पाई है और मामले से स्थानीय विधायक को अवगत करा दिया गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए यूं ही संघर्ष करना पड़ेगा, या प्रशासन इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकाल पाएगा। वही देखा जाए तो पंचायत में साफ सफाई अभियान को लेकर 3 महीने में लाखों रुपए के टेंडर छोड़ जाते है जिसके द्वारा पंचायत में ठेकेदार साफ सफाई करवाता है लेकिन यह नजारा कुछ अलग ही है चारों तरफ धूल मिट्टी और गंदगी नजर आ रही है वही पंचायत के स्कूलों की बात की जाए तो ग्रामीण उस बात से भी नाराज उनका कहना है स्कूलों में अध्यापक कम है और बच्चे ज्यादा जहां बच्चे पढ़ाई के अभाव से झुझ रहे है, स्कूल तो इंग्लिश मीडियम कर दिए, लेकिन पढ़ाई के नाम पर सब जीरो है