राज्य सरकार की मंशा ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने की है, लेकिन जिले की बीजाथल ग्राम पंचायत में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में व्यवस्थाओं पर ही सवाल खड़े हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस साउंड सिस्टम से सरकारी योजनाओं की जानकारी और शिविर संबंधी घोषणाएं की जानी थीं, उस पर लगातार फिल्मी गाने बजाए जाते रहे। लोगों ने बताया कि एक समय ‘किसी की याद सताए तो शराब पी लेना’ जैसे गीत भी बजाए गए। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो साउंड सिस्टम संचालित कर रहे शिवराज मेट ने दूसरा गीत चला दिया गया। शिविर के दौरान हॉल के बाहर बड़ी संख्या में महिलाएं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इंतजार करती रहीं, जबकि अंदर विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। कई ग्रामीण अपनी समस्याओं के समाधान के लिए घंटों बैठे रहे, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी। जॉब कार्ड की समस्या का भी नहीं हुआ समाधान शिविर में ग्रामीण रामनिवास और सुरजाराम जॉब कार्ड बनवाने और उसमें संशोधन करवाने पहुंचने पर संबंधित कर्मचारियों ने वेबसाइट नहीं चलने का हवाला देकर उन्हें अगले दिन आने की सलाह दे दी। इससे लोगों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा। एक ग्रामीण ने बताया कि विभागीय त्रुटि के कारण उसकी पत्नी का नाम जॉब कार्ड से हट गया था। पिछले कई महीनों से वह पंचायत और विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। शिविर में भी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उसे जयपुर जाकर कार्रवाई करवाने की सलाह दे दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि सेवा शिविरों का उद्देश्य आमजन को मौके पर राहत देना है, लेकिन यदि छोटी-छोटी समस्याओं का भी समाधान नहीं होगा तो ऐसे शिविरों की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शिविर में सरपंच संग्राम राम बोरानिया, शिविर प्रभारी जगदीश माली, एलडीसी नेता राम, कृषि सुपरवाइजर जोगीराम, डॉ. हेमंत कलावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने मांग की कि भविष्य में सेवा शिविरों में व्यवस्थाओं में सुधार कर समस्याओं का समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए।