नमस्कार जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल के सामने महिला कार्यकर्ता ने ऐसा भजन सुनाया कि सबके चेहरे खिल गए। दौसा में किरोड़ी बाबा ने बताया कि उन्होंने कितनी लड़ाइयां लड़ी। जयपुर में समधी बनने के बाद मंत्रीजी और विधायकजी ने डांस किया और भरतपुर में ‘बसंती’ ने ‘वीरूगिरी’ दिखा दी। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. मुख्यमंत्रीजी को सुनाया ‘भजन’ मौका था, दस्तूर भी था। बीजेपी का स्थापना दिवस। दफ्तर में कार्यकर्ताओं की गहमा-गहमी। प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्रीजी खुद भी मौजूद। ऐसे में पार्टी की कार्यकर्ता मैडम उत्साहित। उनकी जुबान पर एक गीत था। जिसे सीएम साहब के सामने ही रिलीज करना चाहती थीं। मन की बात संगठन के मुखियाजी तक पहुंचाई। मुखियाजी ने व्यवस्था कराई। सीएम साहब गीत सुनने को तैयार। मैडम भी चूकी नहीं। कुछ ही पल में रंग जमा दिया। मुख्यमंत्री भजनलालजी को भजन सुना दिया। भजन की तर्ज प्राचीन बंबइया फिल्म के गीत ‘दिल लूटने वाले जादूगर’ पर थी। मूल गीत में जादूगर की महिमा का वर्णन था, लेकिन महिला कार्यकर्ता के गीत का केंद्र-बिंदु भजनलाल जी। महिला ने गाया- दुनिया में लोग हजारों हैं, मेरे भजनलालजी का क्या कहना। जब ये कुर्सी पर बैठ गए और पेपरलीक पकड़े गए। डोटासरा बिचारा बेचैन हुआ। सबको जेलों में डाल दिया। तुकबंदी पर सबके चेहरे खिल गए। मैडम पूरे नंबर ले गईं। वैसे SI भर्ती की परीक्षा के दौरान सरकार की मंशा भी दिखी। अजमेर में RPSC सचिव खुद चेकिंग करने मैदान में उतरे। नागौर में तो फोन को सेंटर पर ले जाने की बात पर पुलिस और मास्टर साहब भिड़ गए। 2. सबसे ज्यादा लड़ाइयां लड़ने वाले 'लीडर' किरोड़ी बाबा के एक बयान के बाद पाठ्य-पुस्तक वालों को चिंता है कि कहीं इतिहास की किताबों में फिर कोई फेरबदल न करना पड़े। किरोड़ी बाबा दौसा के महवा गए थे। वहां लोकार्पण-शिलान्यास आदि के कार्यक्रम थे। पंडाल लगा था, मंच सजा था, सामने जनता थी। कृषि मंत्री किरोड़ी लालजी ने माइक संभाला। दावा करते हुए कहा- किसी भी नेता ने इतनी लड़ाई नहीं लड़ी, जितनी मैंने लड़ी हैं। मैं कोई खुद की बड़ाई नहीं कर रहा। वैसे तो इसे खुद की बड़ाई करना ही कहते हैं, लेकिन मंत्रीजी ने कहा तो लोगों में खुसर-पुसर हुई। अब तक तो इतिहास में राणा सांगा और महाराजा सूरजमलजी का ही नाम सबसे ज्यादा लड़ाइयों के लिए दर्ज था। जनता गौर से सुनने लगी। कृषि मंत्रीजी आगे बढ़े- मैंने 650 छोटे-बड़े आंदोलन किए। 28 बार गिरफ्तार हुआ। 17 बार जेल गया। मुझ पर 136 मुकदमे लगे। फेहरिस्त पर जनता निसार हो गई। हवा का रुख भांप किरोड़ी बाबा ने सवाल उछाल दिया-आपने भी सोचा था कि सारी लड़ाई तो डॉक्टर किरोड़ी लाल ने लड़ी, और बना दिया कृषि मंत्री? इससे पहले कि जनता जवाब में आंदोलन कर बैठती, बाबा ने बात संभाली। बोले- कृषि मंत्री के रूप में भी मैंने खूब काम किए। नकली खाद बीज और दवाइयां पकड़ी, छापे मारे। 3. समधी बने मंत्रीजी और विधायकजी मंत्रीजी और विधायकजी एक पार्टी में हैं। फिर भी गठबंधन होने जा रहा है। यह गठबंधन सियासी नहीं, पारिवारिक है। मंत्रीजी और विधायकजी समधी बन गए हैं। UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा की बिटिया और विराटनगर विधायक कुलदीप धनकड़ के बेटे की सगाई हो गई। सगाई के कार्यक्रम जयपुर में हुए। धनखड़जी खुशी में नाचने लगे। साथ देने के लिए खर्राजी ने भी ताली बजाई और हाथ ऊंचे करके हिलाए। सोशल मीडिया पर डांस का वीडियो आया। गाना बज रहा है- फिर तो ऐसा करे धमाल, सीधी कर दे सबकी चाल। इस गठजोड़ से दोनों परिवारों में खुशी का माहौल है। 21 अप्रैल को मंत्रीजी के पैतृक गांव में विवाह की रस्में होंगी। 4. चलते-चलते.. 50 साल बाद ही सही। यह मिथक टूटा कि बसंती का हाथ मांगने वीरू को ही टंकी पर चढ़ना पड़ेगा। म्हारी बसंती के वीरू से कम है? जमाना बदल गया। बसंती अब सड़कों पर धन्नो को दौड़ाने वाली लड़की नहीं। उसे संविधान, अधिकार और कानून का पता है। भरतपुर के बयाना की बात है। लड़की ने लव किया और मैरिज का मन बना लिया। परिवार को ऐतराज। लड़का सजातीय नहीं। अंतर्जातीय विवाह मंजूर नहीं। लड़की की मिन्नतों के बाद भी परिवार राजी नहीं हुआ तो लड़की टावर पर चढ़ गई। 150 फीट ऊंचाई से इरादे जाहिर कर दिए। पूरे गांव को सूचना लग गई कि अमुक जाति की लड़की फलां जाति के लड़के से विवाह करना चाहती है। टावर के नीचे मेला लग गया। नायब तहसीलदार मैडम भी पहुंचीं। लड़की आश्वासन पाकर उतर आई। हालांकि टंकियों पर चढ़कर, सुसाइड की धमकी देकर ब्लैकमेल करना कानून की नजर में ठीक नहीं। बाकी, समाज में कई परिवर्तन ‘नौटंकियों’ से भी आते हैं। इनपुट सहयोग- ऋषभ सैनी (जयपुर), हनुमान तंवर (नागौर), राजेंद्र गुर्जर (महवा, दौसा) महेश शर्मा (बयाना, भरतपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..