बूंदी के नमाना क्षेत्र के हरिपुरा गांव में गुरुवार सुबह करीब 400 साल पुरानी अकाल-सुकाल की परंपरा निभाई गई। रघुनाथ जी मंदिर में रथ यात्रा के दौरान हुए इस अनुष्ठान में 40 गांवों से हजारों ग्रामीण जुटे। करीब 45 मिनट तक चले अनुष्ठान के बाद सुकाल की तणी लकड़ी की रॉड पर आकर रुक गई, जिसे ग्रामीणों ने इस साल अच्छी बारिश और बेहतर खेती का शुभ संकेत माना। रथ यात्रा के साथ शुरू हुआ अनुष्ठान मंदिर के पुजारी छितर लाल बैरागी ने सुबह 7 बजे हवन कुंड में आहुतियां देकर अनुष्ठान की शुरुआत की। इसके बाद ढोल-नगाड़ों के बीच दो अर्धनग्न लड़कों का तिलक कर उन्हें मंदिर से करीब 100 फीट दूर खड़ा किया गया। दोनों के गले में दो रस्सियां डाली गईं, जिनमें एक अकाल और दूसरी सुकाल का प्रतीक थी। दोनों रस्सियां मंदिर की ओर जाती थीं। 45 मिनट बाद सुकाल की तणी रॉड पर रुकी मंदिर प्रांगण में दो फीट ऊंची लकड़ी की रॉड गाड़कर उसकी गेहूं के दाने, पुष्प और अक्षत से पूजा की गई। दोनों लड़के करीब 45 मिनट तक खड़े रहे। सुबह 7:45 बजे सुकाल की तणी अपने आप रॉड पर आकर रुक गई। इसे शुभ संकेत मानते हुए ग्रामीणों ने जयकारे लगाए और अनुष्ठान संपन्न किया। ग्रामीणों के लिए मौसम का पारंपरिक संकेत ग्रामीणों का विश्वास है कि सुकाल की तणी रुकने का अर्थ है कि इस वर्ष अच्छी बारिश होगी। इसी आधार पर किसान धान की रोपाई की योजना बनाते हैं, जबकि कई विद्यार्थी भी इसे शुभ मानकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सकारात्मक संकेत मानते हैं। पिछले साल अकाल का संकेत सही साबित होने का दावा पुजारी छितर लाल बैरागी ने बताया कि वर्ष 2025 में अकाल की तणी चढ़ी थी। उस समय आशंका जताई गई थी कि या तो बारिश कम होगी या फिर अत्यधिक वर्षा से नुकसान होगा। उनके अनुसार बाद में तेज बारिश के कारण क्षेत्र के कई खेत बह गए थे, जिससे ग्रामीणों का इस परंपरा पर विश्वास और मजबूत हुआ। बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद अनुष्ठान के दौरान हरिद्वार मीणा, दुर्गाल मीणा, सुरेश मीणा, भंवरलाल मीणा, किशनलाल मीणा, चौथमल शर्मा, उदयलाल मीणा, लटूरलाल मीणा, मुकुट बिहारी मीणा, विष्णु शर्मा, ओमप्रकाश मीणा, दौलतराम मीणा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।