देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी का रिजल्ट एनटीए ने गुरुवार देर रात घोषित कर दिया। परिणामों में कोटा कोचिंग के स्टूडेंटस ने कमाल किया है। साथ ही कई ऐसी कहानियां भी सामने आ रही है जिनमें बच्चों और उनके पेरेंटस ने एक दूसरे के लिए मोटिवेशन का काम किया। बूंदी जिले के छोटे से गांव भवानीपुरा के रहने वाले आर्यन सालों से कोटा परिवार के साथ रह रहे हैं।
पिता मुरलीधर स्टेशनरी का छोटा-मोटा काम करके वे किसी तरह परिवार का खर्च चलाते हैं। आर्यन का घर इतना छोटा था कि पढ़ाई के लिए अलग कमरा तो दूर, अलग कोना भी मुश्किल से मिलता था। उसी एक कमरे में पूरा परिवार खाना खाता, उठता-बैठता और रात को सो जाता। उसी कमरे के एक कोने में बैठकर आर्यन घंटों पढ़ाई करता। 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा में उसके शानदार 648 अंक आए। इस सफलता ने पूरे परिवार को खुशी से झूमने का मौका दे दिया। घर में जश्न शुरू हो चुका था। सभी को भरोसा था कि अब सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलना तय है। लेकिन फिर परीक्षा रदद हो गई। लेकिन आर्यन ने इस बार भी हिम्मत नहीं हारी। उसने दोबारा तैयारी शुरू कर दी। 21 जून को पुनर्परीक्षा का दिन आया। परीक्षा से पहले आसमान में बादल छाए हुए थे। परीक्षा केंद्र में मेरी सीट खिड़की के पास थी। टेबल लैब की ढलान वाली थी, जिस पर लिखना बेहद मुश्किल था। इसी बीच परीक्षा शुरू होने के करीब एक घंटे बाद तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। खिड़की से आती बारिश की बूंदें उत्तर पुस्तिका तक पहुंचने लगीं। कागज भीगने लगे और लिखना कठिन होता गया, लेकिन मैं रुका नहीं। जितना बचा सकता था, उतना बचाते हुए मैंने पूरी परीक्षा दी। अब रिजल्ट आया तो मेरे 610 नंबर आए। इन अंकों के आधार पर मुझे अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने की संभावना है। मेरे पिता को पैरालाइसिस है। एक्सीडेंट में घायल हुई मां, फिर भी बेटे को परीक्षा सेंटर पर लेकर गई बिहार के पटना के रहने वाले रणवीर ने कोटा में रहकर नीट की कोचिंग की। उनकी 39वीं रैंक आई है। रणवीर की मां निशि सिंह ने बताया- एग्जाम से दो दिन पहले बच्चे का सेंटर देखने जा रही थी। तब टेम्पो पलटने से मेरे सिर में चोट लग गई थी। इसके बाद भी बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए एग्जाम के दिन उसे सेंटर पर छोड़ने गई थी। बेटे ने बहुत मेहनत की है, जिसकी बदौलत उसे ये सफलता मिली है। सबसे बडी बात यह है कि रणवीर, उसकी मां और बहन तीनो कोटा रहे थे लेकिन रणवीर मां और बहन से अलग रूम लेकर रहता था ताकि पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो। रणवीर ने बताया कि सफलता के लिए आपके टीचर्स जो आपको गाइड कर रहे है वह बात मानो। रिफ्रेश करने के लिए यूटयूब शॉर्ट देखते थे आयुष
ऑल इंडिया रैंक नंबर चार पर रहे आयुष मूल रूप से नवादा (बिहार) के वरीसालीगंज गांव के रहने वाले है। आयुष ने कोटा में रहकर नीट की तैयारी की है। पिता सुनील कुमार का बिजनेस है। आयुष के 10वीं में 96.2% और 12वीं में 93.8 प्रतिशत नंबर आए थे। आयुष के परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है। आयुष ने बताया कि बचपन से ही मेरा सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने का था। नियमित पढ़ाई, नीट की गहन तैयारी, लगातार रिवीजन और रेगुलर टेस्ट मेरी सफलता की सबसे बड़ी वजह रहे। खुद को रिलेक्स करने के लिए मोबाइल भी चलाता था। मोबाइल पर यूटयूब शॉट्र्स (वीडियो) देखना पंसद है। आयुष ने बताया कि जब नीट रद्द हुई, उस समय स्कोर 695 बन रहा था। इस बार नंबर और बढ़ गए। पेपर रद्द हुआ तो टेंशन नहीं थी, क्योंकि तैयारी पूरी थी। गौरव बोले- जैसा टीचर ने गाइड किया, वैसा ही किया
अलवर के रहने वाले गौरव सिंह ने नौवीं रैंक हासिल की है। गौरव के पिता राजेश कुमार आर्मी में हैं। कोटा में रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट गौरव ने बताया कि मां सीमा देवी मेरे और बहन के साथ कोटा में रहकर हमारी पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती थीं। उन्होंने हर परिस्थिति में हमारा हौसला बढ़ाया। नीट की तैयारी के दौरान मैंने डेली क्लास अटेंड की। एनसीईआरटी की बुक्स को कई बार पढ़ा। कंटीन्यू रिवीजन किया और टेस्ट को पूरी गंभीरता से दिया। स्मार्टफोन यूज करता था, लेकिन उसका मिसयूज नहीं करता था। क्लासरूम के अलावा 7-8 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। टीचर्स ने जो बताया, जो गाइड किया मैंने वैसे ही किया। पूरी रात पढ़ाई करता था, दोपहर में क्लास लेता था
कोटा के रहने वाले कार्तिक ने ऑल इंडिया 16वीं रैंक हासिल की है। कार्तिक ने बताया कि मैं रात को पढ़ाई को प्राथमिकता देता था। सेल्फ स्टडी के लिए रात 9:30-10 बजे से सुबह चार से पांच बजे पढ़ता था। दोपहर में कोचिंग के बाद शाम को पावर नेप (ब्रेक) लेता और फिर रात को पढ़ाई का वही शेडयूल रहता। मेरे पिता इंजीनियर हैं। उन्होंने भी कोटा में ही इंजीनियरिंग की तैयारी और पढ़ाई की थी। मैं खुद को रिलेक्स करने के लिए फुटबॉल खेलता था। पेपर रदद हुआ तो डिमोटीवेट हुई थी
कोटपुतली राजस्थान की रहने वाली अनुष्का ने भी कोटा में पढाई की है। उसने आठवीं कक्षा से तैयारी शुरू कर दी थी। क्लास टीचर्स जो बताते थे वह किया। क्लास में जो पढाया वह अच्छे से तैयार किया और हर टेस्ट दिया। रिलेक्स रहने के लिए घर पर मां से बात कर लिया करती थी। लास्ट पेपर जब रदद हुआ तो डिमोटीवेट हो गई थी लेकिन फिर लगा कि अच्छा मौका है रैंक सुधार सकते है। कृतिक ने हासिल की 18वीं रैंक कृतिक ने बताया कि क्लास में जो पढाया जाता था उन्हे रिवाइज करता था। सिलेबस होने के बाद फिजिक्स और केमिस्ट्री को दी। कंसेप्ट क्लियर करने में ज्यादा समय दिया है। पढाई का फिक्स शेडयूल नहीं था बिहार के रहने वाले मोहम्मद फवाज ने 81 रैंक हासिल की है। उन्होंने भी कोटा में रहकर पढ़ाई की है। फवाज ने बताया कि पढ़ाई का कोई फिक्स शेडयूल नहीं था। 6 से आठ घंटे सेल्फ स्टडी कर लिया करते थे। पेपर रदद हुआ तब भी ज्यादा टेंशन नहीं थी। लगभग सेम ही मार्क्स आए हैं।