नीट परीक्षा में पास हुए कई स्टूडेंट्स की ऐसी कहानियां भी सामने आई, जिनमें बच्चों और उनके पेरेंट्स ने एक-दूसरे के लिए मोटिवेशन का काम किया। कोटा के आर्यन की नीट में 3164वीं रैंक आई। उन्होंने कहा- पहली नीट परीक्षा में मेरे 648 अंक आए, लेकिन परीक्षा रद्द हो गई। वहीं दोबारा हुई परीक्षा में केंद्र में मेरी सीट खिड़की के पास थी। परीक्षा शुरू होने के एक घंटे बाद तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। खिड़की से आती बारिश की बूंदों से उत्तर पुस्तिका भीग गई थी। कोशिश करते हुए कॉपी को बचाया। वहीं बिहार के पटना के रहने वाले रणवीर की 39वीं रैंक आई है। रणवीर की मां निशि सिंह ने बताया- एग्जाम से दो दिन पहले टेम्पो पलटने से मेरे सिर में चोट लग गई थी। इसके बाद भी बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए एग्जाम के दिन उसे सेंटर पर छोड़ने गई थी। बता दें कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी का रिजल्ट एनटीए ने गुरुवार देर रात घोषित कर दिया है। परिणामों में कोटा कोचिंग के स्टूडेंट्स ने सफलता हासिल की है। पढ़ें ऐसे स्टूडेंट्स की कहानी। पहली परीक्षा रद्द होने पर नहीं हारी हिम्मत बूंदी जिले के छोटे से गांव भवानीपुरा के रहने वाले आर्यन की नीट में 3164वीं रैंक आई है। वे सालों से परिवार के साथ कोटा रह रहे हैं। पिता मुरलीधर स्टेशनरी का काम करके किसी तरह परिवार का खर्च चलाते हैं। आर्यन ने कहा- घर इतना छोटा है कि पढ़ाई के लिए अलग कमरा नहीं है। एक कमरे में पूरा परिवार खाना खाता, उठता-बैठता और रात को सोता है। आर्यन ने कहा- उसी कमरे के एक कोने में बैठकर मैंने घंटों पढ़ाई की। उन्होंने कहा- 3 मई को हुई नीट में मेरे 648 अंक आए। इस सफलता से परिवार खुश हुआ। घर में जश्न मनाया गया। सभी को भरोसा था कि अब सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलना तय है, लेकिन परीक्षा रद्द हो गई, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैंने दोबारा तैयारी शुरू की। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा दी। आर्यन ने कहा- परीक्षा से पहले आसमान में बादल छाए हुए थे। परीक्षा केंद्र में मेरी सीट खिड़की के पास थी। टेबल लैब की ढलान वाली थी, जिस पर लिखना मुश्किल था। परीक्षा शुरू होने के करीब एक घंटे बाद तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। खिड़की से आती बारिश की बूंदें उत्तर पुस्तिका तक पहुंचने लगीं। कागज भीगने लगे और लिखना कठिन होता गया, लेकिन मैं रुका नहीं। जितना बचा सकता था, उतना बचाते हुए मैंने पूरी परीक्षा दी। अब रिजल्ट आया तो मेरे 610 नंबर आए। इन अंकों के आधार पर मुझे अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने की संभावना है। मेरे पिता को पैरालाइसिस है। एक्सीडेंट में घायल हुई मां, बेटे को परीक्षा सेंटर पर लेकर गई बिहार के पटना के रहने वाले रणवीर ने कोटा में रहकर नीट की कोचिंग की। उनकी 39वीं रैंक आई है। रणवीर की मां निशि सिंह ने बताया- एग्जाम से दो दिन पहले बच्चे का सेंटर देखने जा रही थी। तब टेम्पो पलटने से मेरे सिर में चोट लग गई थी। इसके बाद भी बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए एग्जाम के दिन उसे सेंटर पर छोड़ने गई थी। बेटे ने बहुत मेहनत की है, जिसकी बदौलत मुझे ये सफलता मिली है। सबसे बड़ी बात यह है कि रणवीर, उसकी मां और बहन तीनों कोटा रहे थे, लेकिन रणवीर मां और बहन से अलग रूम लेकर रहता था, ताकि पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो। रणवीर ने बताया- सफलता के लिए टीचर्स जो आपको गाइड कर रहे हैं, वह बात जरूर मानो। रिफ्रेश करने के लिए यूट्यूब शॉर्ट देखते थे आयुष ऑल इंडिया रैंक नंबर चार पर रहे आयुष मूल रूप से नवादा (बिहार) के वरीसालीगंज गांव के रहने वाले हैं। आयुष ने कोटा में रहकर नीट की तैयारी की है। पिता सुनील कुमार का बिजनेस है। आयुष के 10वीं में 96.2% और 12वीं में 93.8 प्रतिशत नंबर आए थे। आयुष के परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है। आयुष ने बताया- बचपन से मेरा सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने का था। नियमित पढ़ाई, नीट की तैयारी, लगातार रिवीजन और रेगुलर टेस्ट मेरी सफलता की सबसे बड़ी वजह रहे। खुद को रिलेक्स करने के लिए मोबाइल भी चलाता था। मोबाइल पर यूट्यूब शॉट्‌र्स (वीडियो) देखना पसंद है। आयुष ने बताया- जब नीट रद्द हुई, उस समय स्कोर 695 बन रहा था। इस बार नंबर और बढ़ गए। पेपर रद्द हुआ तो टेंशन नहीं थी, क्योंकि तैयारी पूरी थी। गौरव बोले- जैसा टीचर ने गाइड किया, वैसा ही किया अलवर के रहने वाले गौरव सिंह ने 9वीं रैंक हासिल की है। गौरव के पिता राजेश कुमार आर्मी में हैं। कोटा में रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट गौरव ने बताया- मां सीमा देवी मेरे और बहन के साथ कोटा में रहकर हमारी पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती थीं। उन्होंने हर परिस्थिति में हमारा हौसला बढ़ाया। नीट की तैयारी के दौरान मैंने डेली क्लास अटेंड की। एनसीईआरटी की बुक्स को कई बार पढ़ा। कंटीन्यू रिवीजन किया और टेस्ट को पूरी गंभीरता से दिया। स्मार्टफोन यूज करता था, लेकिन उसका मिसयूज नहीं करता था। क्लासरूम के अलावा 7-8 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। टीचर्स ने जो बताया, जो गाइड किया, मैंने वैसे ही किया। पूरी रात पढ़ाई करता था, दोपहर में क्लास लेता था कोटा के रहने वाले कार्तिक ने ऑल इंडिया 16वीं रैंक हासिल की है। कार्तिक ने बताया- मैं रात को पढ़ाई को प्राथमिकता देता था। सेल्फ स्टडी के लिए रात 9:30-10 बजे से सुबह चार से पांच बजे पढ़ता था। दोपहर में कोचिंग के बाद शाम को पावर नेप (ब्रेक) लेता और फिर रात को पढ़ाई का वही शेड्यूल रहता। मेरे पिता इंजीनियर हैं। उन्होंने भी कोटा में ही इंजीनियरिंग की तैयारी और पढ़ाई की थी। मैं खुद को रिलेक्स करने के लिए फुटबॉल खेलता था। पेपर रद्द हुआ तो डिमोटीवेट हुई थी कोटपूतली राजस्थान की रहने वाली अनुष्का ने भी कोटा में पढ़ाई की है। अनुष्का की 58वीं रैंक आई है। उन्होंने आठवीं कक्षा से तैयारी शुरू कर दी थी। क्लास टीचर्स जो बताते थे, वह किया। क्लास में जो पढ़ाया, वह अच्छे से तैयार किया और हर टेस्ट दिया। रिलेक्स रहने के लिए घर पर मां से बात कर लिया करती थी। लास्ट पेपर जब रद्द हुआ तो डिमोटीवेट हो गई थी, लेकिन फिर लगा कि अच्छा मौका है। रैंक सुधार सकते है। कृतिक ने हासिल की 18वीं रैंक कृतिक ने बताया- क्लास में जो पढ़ाया जाता था। उन्हें रिवाइज करता था। सिलेबस होने के बाद फिजिक्स और कैमिस्ट्री को दी। कंसेप्ट क्लियर करने में ज्यादा समय दिया है। पढ़ाई का फिक्स शेड्यूल नहीं था बिहार के रहने वाले मोहम्मद फवाज ने 81वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने भी कोटा में रहकर पढ़ाई की है। फवाज ने बताया- पढ़ाई का कोई फिक्स शेड्यूल नहीं था। 6 से आठ घंटे सेल्फ स्टडी कर लिया करते थे। पेपर रद्द हुआ, तब भी ज्यादा टेंशन नहीं थी। लगभग सेम ही मार्क्स आए हैं।