नाभि से नीचे के हिस्से को सुन्न करने के लिए इस्तेमाल होने वाले बुपीकेन हैवी इंजेक्शन के एक विशेष बैच के उपयोग और बिक्री पर राजस्थान सरकार ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस इंजेक्शन के इस्तेमाल के बाद मरीजों में गंभीर एडवर्स रिएक्शन (विपरीत प्रभाव) देखे गए हैं। इस आदेश के बाद उदयपुर के स्वास्थ्य महकमे में भी हड़कंप मच गया है। यहां जिला ड्रग स्टोर पर इस प्रभावित बैच के 145 इंजेक्शन स्टॉक में मिले हैं। इन्हें फ्रीज कर दिया गया है। वहीं, आरएनटी मेडिकल कॉलेज के एमसीडीडब्ल्यू स्टोर पर राहत की बात है कि इस कंपनी का यह प्रभावित बैच उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसी सॉल्ट के अन्य कंपनियों के करीब 10 हजार इंजेक्शन मौजूद हैं। इन्हें लेकरसतर्कता बरती जा रही है। सैंपल लेकर तुरंत लैब जांच के लिए भेजने के निर्देश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग के औषधि नियंत्रक अजय पाठक द्वारा जारी आदेश के अनुसार निर्माता कंपनी मैसर्स थेमिस मेडीकेयर लिमिटेड द्वारा औषधि महानियंत्रक (भारत) को भेजी रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान में यह सख्त कदम उठाया गया है। ड्रग कंट्रोलर ने उदयपुर सहित प्रदेश के सभी औषधि नियंत्रण अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित बैच (बीकेबीपीओ 2601) की बिक्री पर तुरंत रोक लगाई जाए। इसकी उत्पादन तारीख मई 2026 और एक्सपायरी अप्रैल 2028 है। कहा गया है कि जो दवाइयां बाजार या सरकारी/निजी अस्पतालों में सप्लाई हो चुकी हैं, उन्हें तुरंत वापस (रिकॉल) मंगाया जाए। इस बैच के सैंपल लेकर तुरंत लैब जांच के लिए भेजे जाएं। हैदराबाद के अस्पतालों से आई थी चौंकाने वाली रिपोर्ट: अपोलो अस्पताल (जुबली हिल्स, हैदराबाद) में 16 मरीजों को यह इंजेक्शन दिया गया था, जिसके बाद उन्हें उल्टी, घबराहट और तेज सिरदर्द की शिकायत हुई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कुछ मरीजों को झटके (सीजर्स) आने लगे, जिन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती करना पड़ा और 2 मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर लेना पड़ा।