जनगणना 2027 के पहले चरण में 16 मई से मकानों की गणना होगी। इसमें घर की स्थिति, सुख-सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। इसमें लोगों की जीवनशैली में आए बदलावों को जानने के लिए कई सवाल शामिल किए गए हैं। मकानों की गणना का डाटा लेने के लिए आने वाले गणना करने वाले घर के सदस्यों की संख्या के साथ-साथ मकान की स्थिति से लेकर घर में क्या सुविधाएं है क्या नहीं। घर में कितने लोग शादीशुदा है, खाना बनाने के लिए क्या इस्तेमाल करते है, जैसे सवाल भी करेंगे। जनगणना के लिए कोटा के सभी 5 जोन को 1688 ईवी ब्लॉक में बांटा गया है। हर ब्लॉक में 200 मकान शामिल किए हैं। 200 मकानों की जनगणना करने की जिम्मेदारी एक गणना करने वाले की होगी। प्रमुख जनगणना अधिकारी एवं जिला कलेक्टर पीयूष समारिया ने बताया- 16 मई से 14 जून तक गणना करने वाले घर-घर जाकर फील्ड वर्क करेंगे। इससे पहले लोग खुद अपना डाटा स्वगणना के तहत भर सकेंगे। यह सुविधा एक मई से 15 मई तक मिलेगी। मकानों की मैपिंग के दौरान कई सवाल करेंगे। इसमें घर में इंटरनेट की पहुंच, लैपटॉप कंप्यूटर, रेडियो, ट्रांजिस्टर, टेलीविजन या स्मार्टफोन है या नहीं इसकी जानकारी लेंगे। आवागमन के साधनों में क्या है, घर का फर्श, दीवार और छत किस सामग्री से बनी है। मकान की हालत कैसी है। मकान किसने बनाया, मकान में कितने कमरे हैं। पानी कहां से आता है, बाथरूम की सुविधा, खाना रसोई गैस पर बनता है या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पर, घर के सदस्यों की संख्या समेत कई सवाल करेंगे। लोगों को 11 अंको का एसईआईडी नंबर मिलेगा नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया- पहले चरण में मकानों की गणना होगी। इसमें आमजन की ओर से स्वगणना 1 मई से 15 मई तक वेब पोर्टल के जरीए की जा सकेगी। देश में पहली बार जनगणना का कार्य ऑनलाइन पोर्टल और ऐप के माध्यम से किया जा रहा है। मकान सूचीकरण में कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे। स्व-गणना पूरी होने पर लोगों को 11 अंको का एसईआईडी नंबर मिलेगा, जिसके आधार पर गणना करने वाले जानकारी का सत्यापन करेंगे। कोटा जिले में कुल 17 चार्ज जनगणना अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इनमें 12 ग्रामीण क्षेत्र, 5 नगर निगम क्षेत्र के लिए आयुक्त, उपायुक्त को चार्ज जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है। हर चार्ज अधिकारी के अधीन एक-एक नियमित सहायक रहेगा है। फरवरी माह में चार्ज अधिकारी को तथा नियमित सहायकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिले में दो मास्टर ट्रेनर्स और 71 फील्ड ट्रेनर्स नियुक्त किए गए है। कोटा जिले में कुल 3519 जनगणना करने वाले नियुक्त किए गए हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 1831 और शहरी क्षेत्र में 1688 प्रगणक शामिल है। जनगणना को लेकर सवाल और उनके जवाब… जनगणना जरूरी क्यों है? -जनगणना किसी देश में रहने वाले लोगों की आधिकारिक गणना है। इसमें उनकी जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक विवरणों की जानकारी शामिल होती है। यह गांव, शहर और वार्ड स्तर पर प्राथमिक जनसंख्या आंकड़े प्रदान करती है। इसमें मकान, जनसंख्या संरचना और आर्थिक गतिविधियों जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है, जिससे विकास कार्यक्रमों और प्रभावी सार्वजनिक प्रशासन को सक्षम बनाया जा सके। जनगणना के आंकड़ों का उपयोग सरकार की ओर से योजना निर्माण और नीतियां बनाने, निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन, संसाधनों के आवंटन और व्यवसायिक योजनाओं के लिए किया जाता है। जनगणना में कौन-कौन सी जानकारी ली जाएगी पहले चरण में मकान की स्थिति, परिवार से संबंधित विवरण, पेयजल, शौचालय, बिजली, खाना पकाने के लिए उपयोग होने वाला ईंधन, इंटरनेट आदि जैसी सुविधाओं की उपलब्धता की जानकारी ली जाती है। साथ ही परिवार के स्वामित्व वाली संपत्तियों जैसे रेडियो, टीवी, कंप्यूटर, दोपहिया वाहन, चारपहिया वाहन आदि की जानकारी ली जाती है। दूसरे चरण में परिवार में सदस्यों की संख्या तथा उनका नाम, उम्र, वैवाहिक स्थिति, जाति, धर्म, शिक्षा, भाषा, विकलांगता, प्रवासन, व्यवसाय समेत अन्य जानकारी ली जाती है। जनगणना दो चरणों में क्यों हो रही है - जनगणना का उद्देश्य बिना चूक और बिना दोहराव के गणना करना है। इसके लिए जरूरी है कि जनगणना से पूर्व एक मास्टर फ्रेम तैयार किया जाए। जनगणना का पहला चरण यही काम करता है, जिसमें हर गांव और शहर के वार्ड में स्थित भवन, मकान को नंबर दिए जाते हैं। सूचीबद्ध किया जाता है। इसके अलावा जनसंख्या गणना तय समय में बिना किसी गलती के पूरी हो, इसके लिए पहला चरण मदद करता है। क्या जनगणना में ली गई जानकारी गोपनीय रहेगी - हां, जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 15 के अंतर्गत गोपनीयता रखी जाती है। व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा नहीं की जाती है। केवल कुल आंकड़े अलग अलग प्रशासनिक स्तर जैसे राज्य, जिला, उप-जिला, गांव/शहर आदि पर ही जारी किए जाते हैं। जनगणना में इस बार नया क्या है? - इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। आयोजन, मैनेजमेंट और आंकड़ों को इकट्ठा करने के लिए डिजिटल माध्यम उपयोग किए जाएंगे। साथ ही लोग भी खुद अपने डाटा को रिकॉर्ड कर सकते हैं। जिसे-जिसे स्व-गणना करने को कहा जाता है। यह एक निर्धारित वेब पोर्टल के माध्यम से की जा सकती है। क्या स्व-गणना में दर्ज सूचनाएं अंतिम मानी जाएगी -स्व-गणना के जरीये दर्ज की गई सूचनाओं का सत्यापन घर-घर जाकर किया जाएगा। अगर डाटा भरने में कोई गलती हुई तो सत्यापन के समय उसे ठीक करवाया जा सकेगा। जनगणना से कौन सी योजनाओं का लाभ मिलता है या नाम कट सकता है? - जनगणना में भाग लेने से किसी व्यक्ति को सीधे कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं मिलता और न ही भाग न लेने पर किसी योजना से उसका नाम काटा जाता है।