बारां जिले की छबड़ा नगरपालिका चुनाव की मतगणना पूरी हो गई है। इसके साथ ही छबड़ा की राजनीति की तस्वीर साफ हो गई है, लेकिन सत्ता का रास्ता अभी भी तय नहीं हुआ है। 35 वार्डों के चुनाव परिणाम में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। भाजपा 14 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, कांग्रेस को 12, बसपा को 2 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 7 सीटें मिली हैं। नगरपालिका में बहुमत के लिए 18 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में 7 निर्दलीय पार्षद अब सत्ता की चाबी बन गए हैं। भाजपा 14 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से 4 सीटें दूर है। कांग्रेस के पास 12 सीटें हैं और उसे बहुमत के लिए 6 पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में बसपा के 2 और निर्दलीय 7 पार्षदों की भूमिका बहुत अहम हो गई है। किसी भी दल के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं होने से अब भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजरें निर्दलीय पार्षदों पर टिक गई हैं। बोर्ड गठन से पहले राजनीतिक संपर्क, बैठकों और नए समीकरणों का दौर शुरू होने की संभावना है। आने वाले दिन छबड़ा की स्थानीय राजनीति के लिए बहुत अहम माने जा रहे हैं। अब यह दिलचस्प होगा कि 7 निर्दलीय पार्षद किस दल का समर्थन करते हैं। 21 सितंबर को पालिका अध्यक्ष का चुनाव होगा और तब पता चलेगा कि किसके सिर ताज सजेगा।