कोटा के गुमानपुरा इलाके में थोक फल सब्जीमंडी में गुरुवार सुबह पुलिस की दबंगई और गफलत का एक बड़ा मामला सामने आया है। बारां जिले की छबड़ा थाना पुलिस किसी आरोपी को पकड़ने आई थी, लेकिन गफलत में बारां डिस्कॉम में कार्यरत सीनियर अकाउंटेंट प्रदीप अग्रवाल की घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया। टीम में केवल एक एएसआई वर्दी में था, बाकी जवान सादा वर्दी में थे। विवाद बढ़ने पर गुमानपुरा पुलिस ने प्रदीप अग्रवाल को शांतिभंग के आरोप में लॉकअप में बंद कर दिया। मामले की जानकारी मिलने पर विधायक संदीप शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई और एसपी तेजस्वनी गौतम से बात कर जांच की मांग की है। दरअसल, सीनियर अकाउंटेंट प्रदीप अग्रवाल सुबह करीब 8 बजे सब्जी लेने मंडी पहुंचे थे। वहां सादा वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मियों ने संदेह के आधार पर उन्हें घेर लिया और एक जवान ने उनकी जेब से पर्स निकाल लिया। प्रदीप अग्रवाल को लगा कि वे बदमाश हैं और उनके साथ लूट हो रही है, इसलिए वे वहां से छूटकर भागने लगे। अग्रवाल के परिचय देने के बावजूद पुलिस से उनकी हॉक-टॉक हो गई। इसके बाद अग्रवाल खुद शिकायत करने गुमानपुरा थाने पहुंचे, लेकिन वहां पुलिस ने उनकी एक भी नहीं सुनी और उन्हें लॉकअप में डाल दिया। निवर्तमान पार्षद विवेक मित्तल ने बताया कि प्रदीप अग्रवाल मोबाइल घर भूल गए थे। जब वे 9 बजे तक नहीं लौटे तो परिजनों ने तलाश शुरू की। दोपहर 1 बजे अग्रवाल ने थाने में किसी दूसरे के फोन से घर सूचना दी। परिजनों के पहुंचने पर सीआई महेश कारवाल ने कहा कि कार्रवाई (शांतिभंग में गिरफ्तारी) हो चुकी है। बाद में परिजनों ने उनकी जमानत करवाई। पुलिस वाले मेरी सुनने को तैयार ही नहीं पीड़ित प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि मैं जा रहा था यह लोग मुझे मिले मेरी गाड़ी की नंबर प्लेट को लेकर टोकने लगे। मुझे घेर लिया और आईडी मांगने लगे। उन्होंने मेरे साथ अभद्रता की और मेरी जेब से पर्स भी निकाल लिया। इसका मैंने विरोध किया और आगे बढ़ गया। इन्होंने आगे आकर भी मेरी गाड़ी रोक ली। ये पुलिस वाले किसी वारंटी की तलाश कर रहे थे। इसके बाद मैं उनको यह कहकर वहां से निकल गया कि आप लोग थाने आ जाओ, मैं वहां पुलिस को तुम्हारी शिकायत करूंगा। इस पर वे भी पीछे-पीछे आ गए। मैंने गुमानपुरा थाने में पुलिसकर्मियों को अपनी बात बताई, लेकिन उन्होंने छबड़ा पुलिस की बात ही सुनी। मुझे परिवार को भी सूचना नहीं देने दी। मैंने दोपहर 1 बजे किसी दूसरे का मोबाइल लेकर परिजनों को कॉल किया। दोनों पुलिसकर्मियों की लापरवाही से मुझे घंटों तक हवालात में रहना पड़ा। मर्डर के आरोपी की तलाश थी छबड़ा थाना एएसआई, रोडमल ने बताया कि 18 साल पुराने एक मर्डर के फरार अपराधी की लोकेशन वहीं की आ रही थी। हमने अग्रवाल को बिना नंबर की गाड़ी होने और हुलिया एक जैसा होने पर रोकने की कोशिश की तो वे नाराज हो गए। मेरे साथ गाली-गलौच की। हम वापस जा रहे थे तो इन्होनें वापस घूमकर स्कूटर से हमारे टक्कर मारी। इससे मेरी वर्दी फट गई। इसके बाद भी वे मेरे साथ हाथापाई व गाली-गलौच करने लगे। गुमानपुरा थाना अधिकारी महेश कारवाल ने बताया कि अग्रवाल से नाम पूछा तो नहीं बताया, उन्होंने स्कूटर से टक्कर मारी और अभद्रता की, इसलिए उनको शांतिभंग में गिरफ्तार किया। शांतिभंग की धारा का गलत उपयोग कोटा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत सिंह ने बताया कि जब पुलिस किसी व्यक्ति को पकड़ रही है तो पहले उसको यह बताया जाना चाहिए कि उसे किस मामले में पकड़ा जा रहा है। शांतिभंग की धाराओं में भी उसी व्यक्ति को पकड़ा जाता है जो बदमाश हो या किसी तरह से शांति भंग कर रहा हो। ऐसे मामले बहुत सेंसेटिव होते हैं, इसलिए पुलिस को बहुत सोच समझकर काम करना चाहिए। पुलिस अक्सर शांति भंग की धारा गलत उपयोग करती है।