चित्तौड़गढ़ में 12वीं बोर्ड के नतीजों ने अच्छे अंकों की खुशी ही नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और बड़े सपनों की मजबूत तस्वीर भी पेश की है। पिता को बचपन में खोने के बावजूद गौरी सिंह ने 98% अंक हासिल कर सेना में जाने का सपना मजबूत किया, तो आयुष रैगर ने मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर 97% के साथ IAS बनने का लक्ष्य साधा। हितांशी सिंह सांखला ने घर की जिम्मेदारियां निभाते हुए 97.20% अंक प्राप्त किए, वहीं टीचर्स की कमी जैसी चुनौतियों के बीच भाग्यश्री ने 97.40% अंक लाकर अपनी मेहनत साबित की। पिता के बिना पली-बढ़ी गौरी, 98% लाकर NDA की तैयारी में जुटी 12वीं साइंस स्ट्रीम में 98 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली गौरी सिंह का सपना भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करना है। परीक्षा खत्म होते ही उसने अपने लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सीकर में NDA की कोचिंग शुरू कर दी है। गौरी की जिंदगी की राह आसान नहीं रही। जब वह मात्र एक साल की थी, तब उसके पिता सुरेंद्र सिंह का निधन पीलिया के कारण हो गया। इसके बाद उसकी मां वंदना सिंह अपने दोनों बच्चों के साथ अलवर स्थित मायके आ गईं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए परिवार की जिम्मेदारी संभाली। गौरी के मामा कौशल किशोर ने इस कठिन समय में बड़ा सहारा दिया। चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक होने के कारण उन्होंने गौरी की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और जहां-जहां उनका ट्रांसफर हुआ, गौरी को भी साथ लेकर गए, ताकि उसकी शिक्षा प्रभावित न हो। गौरी ने सिटी गर्ल्स गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई करते हुए 98 प्रतिशत अंक हासिल किए। इससे पहले 10वीं में भी वह 96.67 प्रतिशत अंक ला चुकी है। इस बार उसने मैथ्स और केमिस्ट्री में 100 में से 100 अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा साबित की। उसे गणित विषय विशेष रूप से पसंद है और उसने अपने शिक्षक महिपाल चौधरी को सफलता का श्रेय दिया। आयुष रैगर बोला- मोबाइल से दूर रहकर पढ़ाई की, IAS बनने का सपना राउमावि सतपुड़ा के छात्र आयुष रैगर ने 12वीं आर्ट्स स्ट्रीम में 97 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। उसका लक्ष्य शुरू से ही IAS अधिकारी बनना है और इसी फोकस के साथ उसने पढ़ाई की। आयुष ने इंग्लिश में 100, भूगोल में 99, अर्थशास्त्र में 98, हिंदी साहित्य में 98 और हिंदी अनिवार्य में 90 अंक प्राप्त किए। इससे पहले 10वीं में भी वह 96 प्रतिशत अंक ला चुका है। आयुष ने बताया कि उसने 11वीं के बाद ही 12वीं की तैयारी शुरू कर दी थी और फिलहाल CUET की तैयारी कर रहा है। उसके पिता गोवर्धन लाल रैगर पंचायत समिति में एलडीसी हैं, जबकि मां सीमा देवी गृहिणी हैं। आयुष का कहना है कि माता-पिता ने उसे पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान देने का माहौल दिया। उसने कई निजी स्कूलों के ऑफर ठुकराकर सरकारी स्कूल को चुना, क्योंकि उसे वहां का माहौल और शिक्षकों का सहयोग बेहतर लगा। आयुष सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई करता रहा। उसने अपने शिक्षकों से भी कह रखा था कि जरूरी होने पर व्हाट्सएप पर मैसेज कर दें, वह समय मिलने पर खुद कॉल कर लेगा। उसकी इस अनुशासित दिनचर्या और मेहनत की स्कूल के प्राचार्य डॉ. विकास अग्रवाल और शिक्षक भी सराहना करते हैं। पढ़ाई और घर की जिम्मेदारी साथ निभाकर 97.20% लाई हितांशी कैलिबर एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा हितांशी सिंह सांखला ने 12वीं आर्ट्स में 97.20 प्रतिशत अंक हासिल किए। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता देवेंद्र सिंह सांखला, मां पूनम और शिक्षकों को दिया। हितांशी पढ़ाई के साथ-साथ घर के कामों में भी अपनी मां का हाथ बंटाती है और रोजाना 7 से 8 घंटे पढ़ाई करती है। उसके पिता निंबाहेड़ा में शिक्षक हैं, जबकि मां सरस डेयरी के मार्केटिंग विभाग में कार्यरत हैं। हितांशी की मां के अनुसार वह खुद अनुशासन के साथ पढ़ाई करती है और कभी उसे पढ़ने के लिए कहना नहीं पड़ा। उसे सभी विषयों में रुचि है, हालांकि हिंदी विषय को वह चुनौतीपूर्ण मानती है। 10वीं में भी वह 93.70 प्रतिशत अंक ला चुकी है और अब उसका लक्ष्य IAS बनना है। टीचर्स की कमी के बावजूद भाग्यश्री ने 97.40% से किया कमाल गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भदेसर की छात्रा भाग्यश्री ने 12वीं आर्ट्स में 97.40 प्रतिशत अंक हासिल कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता हेमलता और श्रवण कुमार को दिया। भाग्यश्री ने बताया कि उसके स्कूल में कई विषयों के टीचर्स की कमी थी और परीक्षा से पहले इंग्लिश टीचर का भी ट्रांसफर हो गया था। इसके बावजूद अन्य शिक्षकों ने सभी विषयों की पढ़ाई करवाई और कमी महसूस नहीं होने दी। पढ़ाई के लिए उसने यूट्यूब की रिकॉर्डेड क्लासेस का सहारा लिया और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। वह व्हाट्सएप का उपयोग भी केवल 15-20 मिनट तक ही सीमित रखती थी।