चित्तौड़गढ़ जिले में दिव्यांग कोटे से हुई शिक्षक भर्तियों की जांच अब बड़े स्तर पर पहुंच गई है। कुछ समय पहले माध्यमिक शिक्षा विभाग के बानसेन स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल में कार्यरत अध्यापक लेवल-1 चंद्रेश कुमार के खिलाफ दिव्यांग कोटे का गलत लाभ लेकर नौकरी पाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। अब इसी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने मेडिकल जांच में गड़बड़ी मिलने पर चन्द्रेश कुमार सहित पांच शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। इसके बाद शिक्षा विभाग ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में दिव्यांग कोटे से भर्ती हुए 141 शिक्षकों की भी दोबारा मेडिकल जांच कराई जाएगी। अगर किसी की दिव्यांगता भर्ती के तय नियमों के अनुसार नहीं मिली तो उसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने के साथ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सरकार के निर्देश पर हुई दोबारा जांच, 85 में से 5 की रिपोर्ट नियमों के अनुरूप नहीं मिली जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा राजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार और शिक्षा निदेशालय ने साल 2016 से 2022 तक दिव्यांग कोटे से भर्ती हुए शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का दोबारा परीक्षण कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद चित्तौड़गढ़ के प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने संभाग स्तरीय मेडिकल कॉलेज उदयपुर में चित्तौड़गढ़ में पदस्थापित 85 शिक्षकों का मेडिकल परीक्षण कराया। जांच में 80 शिक्षकों की दिव्यांगता भर्ती के मानदंड के अनुसार सही पाई गई, जबकि पांच शिक्षकों की दिव्यांगता निर्धारित सीमा से कम निकली। सरकारी नियमों के अनुसार दिव्यांग कोटे का लाभ सिर्फ 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों को ही मिल सकता है। जिन शिक्षकों की मेडिकल रिपोर्ट इस मानदंड पर खरी नहीं उतरी, उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई। चार शिक्षक निलंबित, एक के खिलाफ पहले से दर्ज है मामला DEO शर्मा ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने दुर्गा गुर्जर, मनीष कुमार मीणा, बालमुकंद बैरागी और जयवीर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और निलंबन अवधि के लिए मुख्यालय भी बदल दिए गए हैं। संबंधित संस्था प्रधानों की ओर से भी रिपोर्ट दी गई है। वहीं पांचवें शिक्षक चंद्रेश कुमार, जो माध्यमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं, उनके खिलाफ पहले ही भदेसर थाने में मामला दर्ज कराया जा चुका है। उन पर आरोप है कि शिक्षक भर्ती-2022 में दिव्यांग श्रेणी का लाभ लेकर नौकरी हासिल की, लेकिन बाद में मेडिकल कॉलेज से हुए दोबारा परीक्षण में उनकी दिव्यांगता भर्ती के लिए तय मानदंड से कम पाई गई। इस मामले में SOG जांच कर रही है। इसके अलावा इनको निलंबित भी कर दिया गया है। संस्था प्रधानों ने दी रिपोर्ट, SOG का कन्फर्मेशन बाकी जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) राजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज उदयपुर की दोबारा जांच में दिव्यांगता भर्ती के तय मानदंड के अनुरूप नहीं मिलने पर चार शिक्षकों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इनमें दुर्गा गुर्जर, अध्यापक लेवल-2 (गणित/विज्ञान), राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नलवाई-चेनपुरिया (बड़ीसादड़ी), मनीष कुमार मीणा, अध्यापक लेवल-2 (गणित/विज्ञान), राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गोपालपुरा-नारेला (चित्तौड़गढ़), बालमुकंद बैरागी, अध्यापक लेवल-2 (हिंदी), राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय दीपपुरा-झरझनी (भैंसरोड़गढ़) तथा जयवीर सिंह, अध्यापक लेवल-2 (अंग्रेजी), पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बोहेड़ा शामिल हैं। इनके खिलाफ संबंधित संस्था प्रधानों ने भी रिपोर्ट दी है। गोपालपुरा-नारेला के शिक्षक के खिलाफ संस्था प्रधान बादाम चौधरी, बोहेड़ा के शिक्षक के खिलाफ सुभाष बुनकर, नलवाई-चेनपुरिया के शिक्षक के खिलाफ मोहन सिंह और दीपपुरा-झरझनी के शिक्षक के खिलाफ राधेश्याम गुर्जर ने रिपोर्ट दर्ज कराई। शर्मा ने बताया कि इन सभी मामलों की रिपोर्ट एसओजी को भेज दी गई है, हालांकि फिलहाल एसओजी में मामला दर्ज होने की कन्फर्मेशन पुष्टि सिर्फ माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक चंद्रेश कुमार के मामले में हुई है। अन्य चार मामलों में एसओजी की कार्रवाई की पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब माध्यमिक शिक्षा के 141 शिक्षकों की होगी मेडिकल जांच प्रारंभिक शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद अब माध्यमिक शिक्षा विभाग में दिव्यांग कोटे से भर्ती होकर वर्तमान में कार्यरत 141 शिक्षकों की भी जांच होगी। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक राजेंद्र शर्मा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज उदयपुर को सभी शिक्षकों की सूची भेज दी गई है। वहां से जांच का शेड्यूल मिलने के बाद शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। मेडिकल कॉलेज एक दिन में करीब 10 शिक्षकों की जांच कर रहा है, इसलिए पूरी प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार पूरी होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद जिन मामलों में गड़बड़ी मिलेगी, उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। एसओजी केस, विभागीय जांच और जवाब का मिलेगा मौका शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इसलिए मेडिकल जांच में गड़बड़ी मिलने वाले सभी मामलों में एसओजी में प्रकरण दर्ज कराया जाएगा। साथ ही राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत विभागीय जांच भी चलेगी। जांच के दौरान संबंधित शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। इसके बाद जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। विभाग का कहना है कि अगर किसी ने गलत तरीके से दिव्यांग कोटे का लाभ लेकर नौकरी हासिल की है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।