चित्तौड़गढ़ जिले में सरस दुग्ध उत्पादन संघ के एक नए आदेश ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। संघ के प्रबंधक द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 19 और 20 अप्रैल को डेयरी बूथों पर कुछ जरूरी उत्पाद उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे। इसमें 200 मिलीलीटर नमकीन छाछ, 500 मिलीलीटर प्लेन छाछ और 200 ग्राम दही कप शामिल हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ये उत्पाद सिर्फ चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के बूथों और पार्लरों में भी नहीं मिलेंगे। शादियों और आखातीज का हवाला दुग्ध संघ ने अपने आदेश में कहा है कि शादियों के कारण खाली कैरट उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं और आखातीज पर दूध की मांग बढ़ने के चलते यह फैसला लिया गया है। हर साल शादियों का सीजन आता है और आखातीज भी हर साल मनाई जाती है, फिर भी पहले कभी इस तरह से जरूरी उत्पादों की सप्लाई नहीं रोकी गई। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस बार ही ऐसी स्थिति क्यों बनी और क्या इसके पीछे प्रबंधन की कमी है। आदेश से पहले ही बाजार में कमी, अब पूरी तरह रोक सरस बूथ एजेंट संघ के अध्यक्ष हरीश संत ने बताया कि समस्या अचानक नहीं आई है। कई दिनों से डेयरी उत्पादों की सप्लाई ठीक नहीं चल रही थी। दही, छाछ, घी और श्रीखंड जैसे उत्पाद पहले से ही बंद थे। दो दिन पहले ही बूथ संचालकों ने जिला कलेक्टर डॉ. मंजू को इसकी शिकायत भी की थी। इसके बाद यह नया आदेश जारी कर दिया गया, जिसमें दो दिन तक सप्लाई पूरी तरह रोकने की बात कही गई है। जो कमी पहले से चल रही थी, उसे अब आधिकारिक रूप से रोक में बदल दिया गया है। जबकि पहले शक्कर उपलब्ध नहीं होने का कारण बताया गया था। उपभोक्ताओं पर असर पड़ रहा सरस बूथ एजेंट संघ के अध्यक्ष हरीश संत ने कहना है कि दूध की सप्लाई सुबह और शाम ही होती है, दिन के समय कैरट खाली रहते हैं। ऐसे में गाड़ियों को सही समय पर भेजकर कैरट का दोबारा उपयोग किया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। संचालकों का साफ कहना है कि यह पूरी तरह से प्रबंधन की लापरवाही है, जिसका असर सीधे बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। दूसरी कंपनियों को मिला मौका सरस बूथ एजेंट संघ के अध्यक्ष हरीश संत ने बताया कि सरस डेयरी के उत्पाद नहीं मिलने का सीधा फायदा दूसरी कंपनियों को मिल रहा है। चित्तौड़गढ़ में सरस की अपनी डेयरी होने के बावजूद अब बाजार में दूसरे ब्रांड के उत्पाद ज्यादा बिकने लगे हैं। रविवार को अमूल कंपनी का बड़ा ट्रोला शहर में पहुंचा, जिसमें करीब 1200 कैरट दूध लाया गया। इसके साथ ही दही, श्रीखंड और 5-5 किलो बड़े 250 मटकों में दही की भी सप्लाई की गई।