चित्तौड़गढ़ में एक नर लेपर्ड तारबंदी में फंस गया। जो लगभग ढाई से तीन साल का था। जिससे लोगों में दहशत फैल गई। मामला कपासन रेंज के जासमा की ढाणी है। जहां शुक्रवार शाम को एक खेत की तारबंदी में लेपर्ड फंसने की सूचना मिली। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। तीन घंटे चला रेस्क्यू लेपर्ड खुद को काफी देर से खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था। जिससे उसके घायल होने का खतरा बना हुआ था। करीब तीन घंटे चले इस रेस्क्यू में टीम ने सबसे पहले हालात को संभाला, उसके बाद लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज किया। लेपर्ड जैसे ही बेहोश हुआ। वैसे ही टीम ने उसे सावधानी से तारबंदी से बाहर निकाला गया। मौके पर उसकी जांच की गई। जिसमें वह स्वस्थ पाय गया। इसके बाद टीम ने उसे बस्सी सेंचुरी के मेकपुरा रिलोकेशन सेंटर ले जाकर सुरक्षित छोड़ दिया गया। बारिश होने से सावधानी रखी गई रेस्क्यू अभियान उप वन संरक्षक राहुल झाझरिया के निर्देशन में चलाया गया। क्षेत्रीय वन अधिकारी (रेंजर) सुरेश चंद्र चौधरी के नेतृत्व में ट्रेंकुलाइजर विशेषज्ञ मनोहर सिंह जाट, प्रशिक्षणाधीन ट्रेंकुलाइजर मेघनाथ, वनपाल ललित कुमार खटीक, वनपाल नानालाल भील और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सबसे पहले वहां मौजूद लोगों को दूर किया। ताकि लेपर्ड किसी पर हमला न कर दें और रेस्क्यू में कोई परेशानी न आए। इसके बाद काफी देर तक लेपर्ड की गतिविधियों पर नजर रखी गई। मौका मिलते ही ट्रेंकुलाइजर गन से उसे बेहोश किया गया। इसके बाद टीम ने सावधानी से तार हटाकर लेपर्ड को बाहर निकाला और सुरक्षित पिंजरे में रखा। लेपर्ड नर था और लगभग ढाई से तीन साल का था। रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम ने लेपर्ड का चिकित्सकीय परीक्षण कराया। जांच में वह पूरी तरह स्वस्थ मिला और उसके शरीर पर कोई गंभीर चोट नहीं पाई गई। इसके बाद उसे बस्सी वन्यजीव अभयारण्य के मेघपुरा रिलोकेशन सेंटर ले जाया गया। जहां सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे खुले जंगल में छोड़ दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पूरे अभियान के दौरान हर कदम पर सावधानी बरती गई, ताकि लेपर्ड और रेस्क्यू टीम दोनों सुरक्षित रहें। ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों ने किया सहयोग रेस्क्यू अभियान के दौरान उज्जवल दाधीच सहित स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग का पूरा सहयोग किया। लगातार बारिश के बावजूद लोगों ने मौके पर शांति बनाए रखी, जिससे टीम को काम करने में आसानी हुई अभियान के दौरान सहायक वन संरक्षक हेमंत गौतम, क्षेत्रीय वन अधिकारी सुरेश चंद्र चौधरी, वनपाल ललित कुमार खटीक, वनपाल नानालाल भील, ट्रेंकुलाइजर विशेषज्ञ मनोहर सिंह जाट, प्रशिक्षणाधीन ट्रेंकुलाइजर मेघनाथ, सतवीर सिंह, नाथू सिंह, पर्यावरण प्रेमी उज्जवल दाधीच, वन्यजीव प्रेमी दीपक खटीक (जासमा), आशीष खोईवाल, वीडीओ प्रदीप अहीर, राजेश जाट, राजू सोनी, चित्तौड़गढ़ से आए वन्यजीव प्रेमी मुबारक हुस्सैन, पीयूष कामले अपनी टीम के साथ, जगदीश गुर्जर, असलम शेख सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।