चित्तौड़गढ़ में लूट की वारदात का पुलिस ने खुलासा करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि बदमाशों ने पीड़ित का पीछा उस समय से करना शुरू कर दिया था, जब उसने अलग-अलग एटीएम से नकदी निकाली थी। इसके बाद जब पीड़ित वी-2 मार्ट के पास कार में बैठकर पैसे गिन रहा था, तब आरोपियों को अंदाजा हो गया कि उसके पास बड़ी रकम है। उन्होंने अपने अन्य साथियों को भी बुलाया और मौका मिलते ही द्वारिका धाम कॉलोनी में बैग, मोबाइल और नकदी लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके कब्जे से लूटी गई नकदी, एटीएम कार्ड, एप्पल आईफोन और वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक भी बरामद की गई है। मामले में तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। रास्ते भर करते रहे पीछा एसपी धर्मेंद्र यादव ने बताया कि सहनवा निवासी संजय पुत्र जगदीश सालवी ने रिपोर्ट दी थी कि उसके बड़े भाई शंकरलाल ने फोन कर घर से रुपए लेकर चित्तौड़गढ़ आने को कहा। संजय अपने दोस्त किशन पुत्र रमेश सेन के साथ अपनी भाभी से रुपए से भरा बैग लेकर चित्तौड़गढ़ पहुंचा। रेलवे स्टेशन के पास वी-2 मार्ट के सामने उसकी मुलाकात भाई शंकरलाल से हुई, जिसने उसे 40 हजार रुपए और दिए। इसके बाद संजय कार में बैठकर पूरे पैसे गिनने लगा। बाद में वह किशन के साथ मोटरसाइकिल पर जेतलियाजी की दुकान की ओर निकला। रास्ते में द्वारिका धाम कॉलोनी में गणपति मंदिर और दरगाह के पास बरगद के पेड़ के नीचे दोनों रुक गए। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल और एक जुपिटर स्कूटी पर चार बदमाश पहुंचे। एक आरोपी ने संजय को धक्का देकर नीचे गिरा दिया, जबकि दूसरे ने रुपए से भरा बैग और एप्पल आईफोन छीन लिया। बैग और मोबाइल स्कूटी पर बैठे साथियों को देकर सभी मौके से फरार हो गए। जांच में सामने आई रकम की सच्चाई शुरुआत में एफआईआर में लूटी गई राशि 4 लाख 90 हजार रुपए दर्ज कराई गई थी। पुलिस जांच में पता चला कि संजय के भाई और भाभी के बीच पहले से यह तय नहीं था कि बैग में कुल कितनी रकम है। बाद में जांच में स्पष्ट हुआ कि घर से लाए गए रुपए और भाई द्वारा दिए गए 40 हजार रुपए मिलाकर बैग में कुल 2 लाख रुपए ही थे। इसी कारण से एफआईआर में ज्यादा राशि लिखी गई थी, जबकि वास्तविक लूट 2 लाख रुपए की निकली। ATM के पास ही घूमते थे आरोपी पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अक्सर एक साथ घूमते थे और नशा करने के दौरान ही उनकी दोस्ती हुई थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि वे एटीएम के आसपास नजर रखते थे। जिस व्यक्ति को ज्यादा नकदी निकालते देखते, उसका पीछा शुरू कर देते थे। इस मामले में भी संजय ने शहर के अलग-अलग एटीएम से पैसे निकाले थे। आरोपियों ने वहीं से उसकी गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया था। जब संजय वी-2 मार्ट के पास कार में बैठकर पैसे गिन रहा था, तब बदमाशों को साफ हो गया कि उसके पास बड़ी रकम है। इसके बाद उन्होंने अपने अन्य साथियों को बुलाया और सुनसान जगह पर वारदात को अंजाम दिया। सीसीटीवी फुटेज से मिली लीड घटना के बाद जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा और वृत्ताधिकारी बृजेश सिंह के सुपरविजन में कोतवाली थाना प्रभारी तुलसीराम और सदर थाना प्रभारी प्रेम सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। टीम ने शहर के कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और तकनीकी साक्ष्य जुटाए। फुटेज में एक आरोपी धीरज का चेहरा साफ दिखाई देने से पुलिस को पहली अहम लीड मिली। इसके बाद पुलिस ने धीरे-धीरे सभी आरोपियों की पहचान कर उनके ठिकानों पर दबिश दी और छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी: पुलिस ने मोक्षधाम के पास कच्ची बस्ती सैंथी निवासी दीपक पुत्र केशुराम खटीक (26), रामनगर कच्ची बस्ती सैंथी निवासी अस्मित राठौड़ पुत्र मुकेश राठौड़, जाति हरिजन (22), बापू नगर कच्ची बस्ती सैंथी निवासी आदित्य खोखर पुत्र किशनलाल खोखर, जाति हरिजन (20), रामनगर कच्ची बस्ती सैंथी निवासी पवन पुत्र उदयलाल मेघवाल (20), हाल निवासी सतपुड़ा थाना चंदेरिया, बीज गोदाम के पीछे पंचवटी सैंथी निवासी धीरज पुत्र लालचंद बैरवा (22) तथा सेंट्रल एकेडमी स्कूल के पास सैंथी निवासी पवन पुत्र खेमदास, जाति वैष्णव (25) को गिरफ्तार किया है। मामले में शामिल तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। कोई पेंटर तो कोई चाय की थड़ी लगाता है पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी दीपक और धीरज पुताई का काम करते हैं। पवन वैष्णव रेलवे स्टेशन के बाहर दो नंबर गेट के पास चाय की दुकान पर काम करता है। बाकी आरोपियों का कोई स्थायी रोजगार नहीं मिला। पुलिस के अनुसार सभी आरोपी आपस में दोस्त हैं और अक्सर एक साथ नशा करते थे। इसी दौरान उन्होंने लोगों की रेकी कर लूट की वारदातों को अंजाम देने की योजना बनाई थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या यह गिरोह पहले भी इसी तरह की वारदातों में शामिल रहा है। इन पुलिसकर्मियों ने निभाई अहम भूमिका मामले के खुलासे में थाना कोतवाली प्रभारी तुलसीराम, थाना सदर प्रभारी प्रेम सिंह, उपनिरीक्षक पारस कुमार, सहायक उपनिरीक्षक नवरंग लाल, चांदमल, हरफूल, हेड कांस्टेबल पुष्पेंद्र सिंह तथा कांस्टेबल ओमप्रकाश, लक्ष्मण सिंह, नंदलाल, राजकुमार, अभिषेक, सहायक उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह, कांस्टेबल भजनलाल, विनोद कुमार, डीएसटी एवं साइबर सेल के कॉन्स्टेबल रामावतार तथा डीएसटी के कॉन्स्टेबल प्रहलाद, दुर्गेश, सुनील कुमार, हेमराज और पदम की विशेष भूमिका रही।