चित्तौड़गढ़ जिले में पंचायती राज चुनाव के प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। इस बार चुनाव में महिलाओं की भागीदारी खास चर्चा में है। 50 प्रतिशत आरक्षण के बीच कहीं महिला प्रत्याशी घूंघट में घर-घर जाकर वोट मांग रही हैं तो कहीं पुरुष उम्मीदवारों के बीच अकेले चुनाव लड़ रही हैं। जिला परिषद वार्ड 16 में भाजपा की सुशीला कंवर और कांग्रेस की कैलाश कंवर के बीच मुकाबला है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 3 नवंबर तथा सरपंच और वार्ड पंच के लिए 5 नवंबर को मतदान होगा। वार्ड 16 पर पूरे जिले की नजर, दोनों महिला उम्मीदवार मजबूत जिला परिषद वार्ड 16 इस बार सबसे चर्चित सीटों में शामिल है। भाजपा ने चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की पत्नी सुशीला कंवर को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की ओर से कैलाश कंवर चुनाव लड़ रही हैं। दोनों को जिला प्रमुख की दौड़ का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। खास बात यह है कि दोनों उम्मीदवार गांवों में लगातार जनसंपर्क कर रही हैं और लोगों से सीधे मिलकर अपने पक्ष में समर्थन मांग रही हैं। चुनाव प्रचार के दौरान हर गांव में इसी मुकाबले की चर्चा सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है। घूंघट में प्रचार कर रहीं सुशीला, लोगों के कहने पर उतरी चुनाव मैदान में भाजपा प्रत्याशी सुशीला कंवर इन दिनों लगातार गांव-गांव जाकर लोगों से मिल रही हैं। कई जगह वे घूंघट में महिलाओं और परिवारों से संपर्क करती नजर आ रही हैं। आक्या गांव उनका ससुराल होने के कारण आसपास के गांवों में भी उनका लगातार प्रचार चल रहा है। सुशीला कंवर का कहना है कि इस बार उनकी खुद चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं थी, लेकिन भदेसर पंचायत समिति की प्रधान रहते हुए किए गए कामों के बाद लोगों ने उन्हें फिर चुनाव मैदान में उतरने के लिए कहा। लोगों के आग्रह पर उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला लिया। उनका कहना है कि यदि जनता मौका देती है तो वे क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी काम करेंगी। कांग्रेस की कैलाश कंवर भी पूरे दम से मैदान में सुशीला कंवर के सामने कांग्रेस की कैलाश कंवर भी पूरी ताकत से चुनाव लड़ रही हैं। कैलाश कंवर वर्ष 2018 में बड़ीसादड़ी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार रह चुकी हैं और क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान है। वे भी लगातार गांवों में जाकर लोगों से मिल रही हैं। चुनाव प्रचार के दौरान वे सड़क, पानी, शिक्षा और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की बात कर रही हैं। दोनों महिला उम्मीदवार अपने-अपने तरीके से मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। यही वजह है कि वार्ड 16 का मुकाबला पूरे जिले में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। 11 पुरुष उम्मीदवारों के बीच अकेली महिला बनी चर्चा का विषय जिला परिषद के साथ सरपंच चुनाव में भी कई महिलाएं इस बार मजबूती से चुनाव लड़ रही हैं। चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति की नेतावल महाराज ग्राम पंचायत इसका बड़ा उदाहरण है। यहां सरपंच पद के लिए कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें 11 पुरुष उम्मीदवारों के बीच अर्चना शर्मा अकेली महिला प्रत्याशी हैं। अर्चना शर्मा बीए पास हैं। उनके सामने गोविंद सिंह, विजय सिंह, जगपाल सिंह, शिवराज सिंह, रामेश्वर धाकड़, किशनलाल धाकड़, गिरधारी भील, नारायण लाल भील, नारायण दास वैष्णव, दशरथ वैष्णव और भरत चारण चुनाव लड़ रहे हैं। इतने बड़े मुकाबले में अकेली महिला उम्मीदवार होने के कारण अर्चना शर्मा की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। महिलाओं के रोजगार और गांव की आय बढ़ाने पर फोकस अर्चना शर्मा का कहना है कि उन्हें महिलाओं का अच्छा समर्थन मिल रहा है और प्रचार के दौरान महिलाएं भी खुलकर उनके साथ आ रही हैं। हालांकि कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है लेकिन ग्रामीणों द्वारा काफी साथ दिया जा रहा हैं। उन्हें उम्मीद है कि मतदाता उन्हें मौका देंगे। उन्होंने कहा कि अगर वे सरपंच चुनी जाती हैं तो गांव के विकास के साथ महिलाओं को रोजगार से जोड़ना उनकी पहली प्राथमिकताओं में रहेगा। उनका कहना है कि गांवों में सिलाई जैसे काम करने वाली महिलाओं के उत्पाद बाजार तक पहुंचाए जा सकते हैं, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी। इसके अलावा पशुपालन को बढ़ावा देकर अच्छी नस्ल की गायों के जरिए दूध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है। वन क्षेत्र से जुड़े इलाकों में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देकर किसानों के लिए आय का नया साधन तैयार करने की भी उनकी योजना है। अर्चना शर्मा के पति वर्ष 2013 में छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में वे भाजपा युवा मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष हैं। इस बार चुनाव की सबसे बड़ी तस्वीर बनी महिलाओं की भागीदारी की संख्या नहीं बढ़ी है, बल्कि कई महिलाएं खुद चुनाव का नेतृत्व करती नजर आ रही हैं। कहीं वे घूंघट में घर-घर जाकर वोट मांग रही हैं तो कहीं बड़े मुकाबलों में पुरुष उम्मीदवारों को चुनौती दे रही हैं। जिला परिषद से लेकर सरपंच चुनाव तक महिलाओं की सक्रिय मौजूदगी चुनाव का माहौल बदलती दिखाई दे रही है। मतदान से पहले गांवों में अब सबसे ज्यादा चर्चा भी इन्हीं महिला उम्मीदवारों की हो रही है। यही वजह है कि इस बार चित्तौड़गढ़ के पंचायत चुनाव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सबसे बड़ा चुनावी संदेश बनकर सामने आई है।