नव नियुक्त जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने सोमवार को मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों में देरी, संसाधनों की कमी और बढ़ते मरीज भार पर चिंता व्यक्त की। कलेक्टर ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए 15 दिन की सख्त समय-सीमा तय की और हर पखवाड़े समीक्षा करने के निर्देश दिए। कलेक्टर गोदारा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीसीबी ब्लॉक और नर्सिंग कॉलेज के निर्माण कार्य निर्धारित समय से पीछे चल रहे हैं। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने और कमियों को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए। नवीन अस्पताल में इंडोर वार्ड निर्माण में देरी को भी गंभीरता से लिया गया और इसे जल्द पूरा करने के आदेश दिए गए। अस्पताल निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने आगामी गर्मी के मौसम को देखते हुए विशेष तैयारियों के निर्देश दिए। उन्होंने वेटिंग एरिया में कूलर और पेयजल की समुचित व्यवस्था, साथ ही मरीजों और उनके परिजनों के लिए पर्याप्त बैठने की सुविधा सुनिश्चित करने को कहा। इसके लिए भामाशाह सहयोग और आरएमआरएस फंड के उपयोग पर भी जोर दिया गया। निरीक्षण में अस्पताल में मरीजों की अत्यधिक संख्या एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आई। कलेक्टर ने बताया कि अस्पताल की क्षमता लगभग 200 बेड की है, जबकि वर्तमान में 400 से 450 मरीज भर्ती हैं। इस कारण संसाधनों और बैठने की व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई मरीजों और परिजनों को जमीन पर बैठा पाया गया, जो व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है। कलेक्टर ने आरएमआरएस फंड की कम आय और इंश्योरेंस क्लेम की कम स्वीकृति को भी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि पर्याप्त फंड के अभाव में अस्पताल का संचालन प्रभावित हो सकता है, जबकि संविदा कर्मचारियों पर ही लगभग 2 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च आता है। ऐसे में फंड बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इन सभी मुद्दों पर आगामी आरएमआरएस बैठक में विस्तृत चर्चा कर स्थायी समाधान निकाला जाएगा। कलेक्टर के सख्त रुख से स्पष्ट है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए प्रशासन गंभीरता से काम कर रहा है।