पचपदरा रिफाइनरी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच सियासी वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया है। सीएम भजनलाल शर्मा के बयान पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा- यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ‘सीएम को रिफाइनरी के इतिहास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है।’ वे सार्वजनिक रूप से गलत बयानबाजी करने के बजाय अपने अधिकारियों से सही आंकड़े और दस्तावेज मंगवाकर पढ़ लें। ये तथ्य बिल्कुल गलत है कि सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में रिफाइनरी का शिलान्यास किया। पचपदरा रिफाइनरी का वास्तविक शिलान्यास 2013 में ही तत्कालीन यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने किया था। उसके बाद केंद्र सरकार और राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पांच साल तक ठंडे बस्ते में डालकर अटकाए रखा, जिससे इसकी लागत 37000 करोड़ रुपए से दोगुनी बढ़कर लगभग 80000 करोड़ रुपए हो गई। राजस्थान में रिफाइनरी की स्थापना के लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) को राजी करना भी एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन के अवसर पर दिए गए वक्तव्य पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पीएम के पास एक बेहतरीन मौका था कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक सरकारी कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप व्यवहार करते। वे पचपदरा रिफाइनरी के विजन से लेकर इसके निर्माण में कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए अभूतपूर्व कार्यों और मेहनत को ईमानदारी से श्रेय दे सकते थे, लेकिन उन्होंने देश के सर्वोच्च पद की गरिमा को दरकिनार कर इस ऐतिहासिक मंच का उपयोग केवल और केवल राजनीतिक बयानबाजी के लिए करना ही उचित समझा, जो निंदनीय है। पूरा देश और प्रदेश भली-भांति जानता है कि इस रिफाइनरी का शिलान्यास वर्ष 2013 में यूपीए सरकार के दौरान हुआ था। तत्कालीन यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण ही राजस्थान को यह सौगात मिलना संभव हो सका था। पीएम के संबोधन पर तंज कसते हुए कहा कि आज देश में कमर तोड़ महंगाई, आसमान छूते पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। राठौड़ का जवाब- रिफाइनरी पर गुमराह करती रही कांग्रेस अशोक गहलोत के विरोध दर्ज कराने पर छिड़ी सियासी बहस के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनको जवाब दिया। राठौड़ ने कहा कि ‘गहलोत साहब, पचपदरा रिफाइनरी को लेकर जनता को गुमराह करना बंद करें।’ बात ‘कागजी शिलान्यास बनाम धरातल का विकास’ की है। राजस्थान की जनता भ्रामक बयानों और चुनावी स्टंट का अंतर अच्छी तरह जानती है। 2013 में चुनाव से ठीक दो महीने पहले बिना बजट, बिना जमीन और बिना पर्यावरण मंजूरी के केवल वोट बैंक के लिए पत्थर लगाना विकास नहीं, राजनीतिक छलावा था। कांग्रेस राज में एचपीसीएल से एमओयू पूरे प्रदेश पर बोझ था। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के हितों को ताक पर रखकर एचपीसीएल से जो एमओयू किया था, वह राजस्थान पर भारी वित्तीय बोझ था। 2014 में भाजपा सरकार ने कड़ा मोलभाव कर राज्य के हजारों करोड़ रुपए बचाए और जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसका वास्तविक ‘कार्यारंभ’ कराया। लागत बढ़ने की दुहाई देने वाले याद रखें कि 2018 से 2023 के बीच अपनी आंतरिक गुटबाजी और प्रशासनिक अकर्मण्यता के कारण इस प्रोजेक्ट को अटकाने, लटकाने और भटकाने का काम किसने किया? मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पचपदरा रिफाइनरी का काम अब पूरी पारदर्शिता और तीव्र गति से पूरा होकर जल्द राजस्थान की प्रगति का नया आधार बनेगा।