महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार किया है, इसे "भ्रमजाल" करार दिया है। गुरुवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी नेताओं ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को बिना शर्त तुरंत लागू करने की मांग उठाई। जिला संगठन महामंत्री कैलाश जैन ने बताया कि यह प्रेस वार्ता प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर आयोजित की गई थी। इसमें बड़ी संख्या में महिला पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जिला प्रभारी मीनाक्षी चंद्रावत ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में कांग्रेस का ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि 1996 में महिला आरक्षण विधेयक संसद में लाने और 2010 में इसे राज्यसभा से पारित कराने में कांग्रेस की अहम भूमिका थी। इसके अतिरिक्त, 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायतीराज और नगरीय निकायों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर महिलाओं को नेतृत्व का अवसर दिया गया। चंद्रावत ने आरोप लगाया कि 2023 में पारित "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" को भाजपा सरकार ने जानबूझकर जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया है, जिससे इसके क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी हो रही है। अंता विधायक प्रमोद जैन भाया ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण को एक अधिकार मानती है, जबकि भाजपा इसे केवल एक चुनावी मुद्दा बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई, बेरोजगारी और किसानों से जुड़े वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस विषय का उपयोग कर रही है। जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया ने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ होती तो कानून लागू करने में कोई देरी नहीं होती। उन्होंने ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए जातीय जनगणना कराने की मांग की। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में बिना परिसीमन के आरक्षण पहले ही लागू हो चुका है। ऐसे में लोकसभा चुनावों में भी इसे तुरंत लागू किया जा सकता है। कांग्रेस ने मांग की कि 543 लोकसभा सीटों पर बिना किसी शर्त महिला आरक्षण लागू किया जाए। नेताओं ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों के लिए कांग्रेस सड़क से संसद तक अपना संघर्ष जारी रखेगी।