चित्तौड़गढ़ के सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सी.पी. जोशी को एक बार फिर संसद में अहम जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें लोकसभा की याचिका (पिटीशन) समिति का सभापति मनोनीत किया गया है। यह समिति कुल 15 सदस्यों की होती है, जिसमें एक सभापति और 14 अन्य सांसद शामिल रहते हैं। इस बार भी जोशी को ही इस समिति की कमान सौंपी गई है, जिससे साफ है कि संसद में उनके काम और अनुभव पर भरोसा जताया गया है। उनके साथ जिन सांसदों को समिति का सदस्य बनाया गया है, उनमें एंटो एंटनी, सुखदेव भगत, राजू बिष्टा, गुरमीत सिंह, बस्तीपति नागराजू, मीतेश पटेल, डॉ. राजकुमार सांगवान, कमलजीत शेहरावत, देवेश शाक्य, मंजू शर्मा, विष्णु दत्त शर्मा, अभय कुमार सिन्हा, राजमोहन उन्निथन और मनोज तिवारी जैसे नाम शामिल हैं। पहले भी निभा चुके हैं कई अहम जिम्मेदारियां सी.पी. जोशी पहले से ही संसद की कई जरूरी समितियों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। वे इस समय याचिका समिति के सभापति के साथ-साथ सार्वजनिक उपक्रम समिति और ऊर्जा समिति के सदस्य भी हैं। इससे पहले वे बहु-राज्य सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक, 2022 से जुड़ी संयुक्त समिति के सभापति भी रह चुके हैं। मनोनीत होने पर जताया आभार याचिका समिति का फिर से सभापति बनाए जाने पर सांसद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान की बात है और वे पूरी ईमानदारी के साथ अपनी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि आम जनता की आवाज को संसद तक पहुंचाने और उससे जुड़े मामलों को सही तरीके से उठाने का काम वे पूरी जिम्मेदारी के साथ करेंगे। यह होता है याचिका समिति का काम लोकसभा की याचिका समिति को संसद की एक जरूरी समिति माना जाता है। इसका मुख्य काम आम लोगों की ओर से संसद में दी गई याचिकाओं पर विचार करना होता है। यह समिति उन याचिकाओं को ध्यान से पढ़ती है, उनसे जुड़े मुद्दों को समझती है और जरूरत पड़ने पर सरकार से राय भी मांगती है। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करती है और संसद में पेश करती है। अगर किसी मामले में सुधार या कार्रवाई की जरूरत होती है, तो समिति इसके लिए सुझाव और निर्देश भी देती है। इसके अलावा यह समिति यह भी देखती है कि नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहें और उनकी समस्याओं पर सही तरीके से ध्यान दिया जाए। इस तरह यह समिति आम जनता और सरकार के बीच एक जरूरी कड़ी का काम करती है, जिससे लोगों की आवाज सीधे संसद तक पहुंच सके।