भास्कर संवाददाता|टोंक राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजी एचएस) के तहत प्राइवेट हॉस्पिटलों में पिछले 10 दिनों से सेवाएं ठप हैं। जयपुर के एक डॉक्टर की गिरफ्तारी के विरोध में प्राइवेट हॉस्पिटल संचालकों ने योजना का सामूहिक बहिष्कार किया हुआ है। ऐसे में 10 दिन बीतने के बावजूद आरजीएचएस सेवा का लाभ लाभ लेने के लिए टोंक समेत प्रदेश भर के लाखों लाभार्थी दर-दर भटक रहे हैं। जो इलाज अब तक केशलैस था, उसके लिए मरीजों को अब हजारों रुपए की भारी-भरकम फीस और दवाओं का बिल चुकाना पड़ रहा है। इसका कारण ये हो रहा है कि सआदत अस्पताल की ओपीडी 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। सामान्य दिनों में अस्पताल की ओपीडी 2400 से 2500 तक रहती आई है, लेकिन पिछले 10 दिनों में यह 3000 तक पहुंच गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी बढ़ने से अस्पताल कर्मियों के पास वर्कलोड बढ़ गया है। आरजीएचएस योजना के तहत इलाज नहीं मिलने से सबसे अधिक परेशानी पेंशनर को उठानी पड़ रही है। अधिकृत हॉस्पिटल संचालकों के अनुसार जिले में रोजाना करीब डेढ़ से दो सो कर्मचारी आरजीएचएस कार्ड से दिखाने आते हैं। इनमें कई पेंशनर होते है। पेंशनर्स रोहित कुमावत, हरवंश शर्मा, राधेश्याम पालीवाल आदि पेंशनर्स ने बताया कि हर महीने वेतनमान से कटौती कराकर भी जेब से भुगतान कर रहे है। सरकारी कर्मचारी विनोद, केदार आदि ने बताया कि वे दोहरे संकट का सामना कर रहे हैं। एक तरफ प्राइवेट हॉस्पिटल ने भर्ती करने मना कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ बाजार दवा विक्रेता भी हाथ खड़े कर रहे हैं। पेंशनर्स प्रहलाद नीमावत, सत्यनारायण आदि ने बताया कि आरजीएचएस में दवा पूरी नहीं मिल रही। उधर, दवा विक्रेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से लंबे समय से भुगतान बकाया है। बजट के अभाव में वे स्टॉक मेंटेन नहीं कर पा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में भी दवा काउंटर पर पहुंचने वाले मरीजों को भी पूरी दवाइयां नहीं मिल रही है। कई दवाएं उन्हें बाहर से नकद पैसे देकर खरीदनी पड़ रही हैं। यह विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधारने की मांग ^मामूली विसंगति पर पूरे डॉक्टर समुदाय को शक की नजर से देखना गलत है। व्यवस्था सुधार के लिए निजी अस्पतालों ने योजना का बहिष्कार किया है। आईएमए ने साफ किया कि कम पैकेज दरें और क्लेम सेटलमेंट में महीनों की देरी ने निजी अस्पतालों की कमर तोड़ दी है। यह विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। आईएमए ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर डॉक्टरों के साथ उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाने की मांग की है। - डॉ. राजीव बंसल , जिला सचिव, आईएमए।