कोटा-झालावाड़ नेशनल हाईवे-52 पर दरा घाटी से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए राहत भरी खबर है। यहां रेलवे की ओर से बनाए जा रहे नए रोड अंडरब्रिज (आरयूबी) का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब इसे मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए एप्रोच रोड पर सीसी सड़क बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होते ही अगले महीने इसे यातायात के लिए खोलने की तैयारी है। नया अंडरपास शुरू होने से दरा घाटी में आए दिन लगने वाले जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। मंडल रेल प्रबंधक अनिल कालरा ने बताया कि आरयूबी का काम लगभग पूरा हो चुका है। एप्रोच सड़क बनने के बाद 15 दिसंबर तक इस पर वाहनों का आवागमन शुरू कर दिया जाएगा। दरा घाटी में जाम की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नया आरयूबी का निर्माण कराया गया है। इसके लिए करीब 9 करोड़ 98 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया था। रेलवे ट्रैक के नीचे 46 मीटर लंबे सीमेंट के बॉक्स लगाए गए हैं, जिनसे अंडरपास का निर्माण किया गया है। रेलवे लाइन के नीचे का काम पूरा हो चुका है। अब इसके आगे करीब 130 मीटर लंबी और 7 मीटर चौड़ी सीसी सड़क बनाई जा रही है। यह सड़क अंडरपास को मुख्य हाईवे से जोड़ेगी। इसके पूरा होने के बाद वाहन चालकों को नए रास्ते से आवाजाही की सुविधा मिल सकेगी। एक ही अंडरपास से निकलते हैं दोनों तरफ के वाहन वर्तमान में दरा घाटी में वाहनों की आवाजाही के लिए एक ही अंडरपास है। ऐसे में दोनों तरफ से एक साथ वाहन आने के कारण रास्ते में जाम लग जाता है। खासकर भारी वाहनों और मालवाहक ट्रकों की आवाजाही के दौरान स्थिति ज्यादा परेशानी वाली हो जाती है। कई बार वाहन चालकों को जाम में घंटो तक इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल उनका समय बर्बाद होता है, बल्कि ईंधन की खपत भी बढ़ती है। नया आरयूबी शुरू होने के बाद वाहनों को आने-जाने के लिए अलग रास्ता उपलब्ध होगा। इससे यातायात का दबाव बंटेगा और आमने-सामने वाहनों के फंसने की समस्या कम होगी। झालावाड़ और मध्यप्रदेश जाने वालों को होगा फायदा कोटा से झालावाड़, झालरापाटन, अकलेरा और मध्यप्रदेश की ओर जाने वाले लोगों के लिए नेशनल हाईवे-52 महत्वपूर्ण मार्ग है। इस रास्ते से रोज बड़ी संख्या में निजी वाहन, बसें और मालवाहक वाहन गुजरते हैं। दरा घाटी में जाम कम होने से यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। साथ ही व्यापारिक गतिविधियों, माल परिवहन और पर्यटन को भी फायदा होगा। विशेष रूप से भारी वाहनों को बार-बार रुकने की समस्या से राहत मिलने पर परिवहन का समय कम होगा। इससे वाहन चालकों का समय और ईंधन दोनों बचेंगे। बता दें 28 मई को कोटा में नेशनल हाईवे-52 पर दरा घाटी के पास रात करीब 8 बजे रेलवे अंडर ब्रिज पर बॉक्स फिशिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रहे जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह सोलंकी और पंकज कुमार झा अचानक मिट्टी ढहने से उसके नीचे दब गए थे। प्रशासन और राहत टीम ने तत्काल रेस्क्यू कर दोनों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई थी