सरकारी स्कूलों में नया सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन हजारों बच्चों की सुरक्षा को लेकर व्यवस्थाएं कागजों में हैं। जिले में 425 स्कूल भवन कभी भी ढह सकते हैं और ढाई हजार को मरम्मत की जरूरत है। इनकी स्थिति सुधारने के बजाय शिक्षा विभाग ने ब्लॉक अधिकारियों से सुरक्षा प्रमाण-पत्र भरवा लिए। अधिकारियों ने भी जमीनी हकीकत देखे बिना इन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (सीबीईओ) से दबाव बनाकर यह प्रमाणित करवाया गया है कि उनके ब्लॉक के सभी स्कूल सुरक्षित हैं, जबकि धरातल पर बच्चों को जर्जर छतों के नीचे या खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। दैनिक भास्कर ने पड़ताल की तो डरावनी तस्वीर सामने आई। इसके अलावा जिले में नए निर्माण और मरम्मत के लिए 432.97 करोड़ रुपए की मांग का प्रस्ताव जयपुर मुख्यालय पर लंबित है। डीएमएफटी फंड से स्वीकृत 79 करोड़ रुपए अन्य कार्यों के लिए हैं। भास्कर पड़ताल - कोटड़ा में सबसे गंभीर स्थिति, डरा रहे 186 भवन जिले में 425 स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हैं। इनमें से सबसे अधिक 186 अकेले कोटड़ा ब्लॉक में हैं। अन्य ब्लॉक की स्थिति भी चिंताजनक है। श्रेणीवार देखें तो 359 प्राथमिक, 37 उच्च प्राथमिक और 29 सीनियर सेकंडरी स्कूल जर्जर हैं। प्रशासन ने बच्चों को वैकल्पिक भवनों में शिफ्ट करने का दावा तो किया है, लेकिन इन नए स्थानों के भौतिक सत्यापन की पुख्ता रिपोर्ट नहीं है। ये 3 भवन तो बानगी, बारिश में क्या होगा? परफॉर्मा में ये 6 दावे 1. सभी कक्ष, रसोईघर और चारदीवारी पूर्णतः सुरक्षित हैं। 2. पेयजल और विद्युत आपूर्ति की उपलब्धता है। 3. बच्चों को क्षतिग्रस्त भवन में नहीं बिठाया जा रहा है। 4. बैठने के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है। 5. जर्जर भवनों को या तो ढहा दिया है या बैरिकेडिंग कर आवाजाही बंद की है। 6. जल स्रोत (टांके, कुएं, बोरवेल) ढंके व सुरक्षित हैं। अफसरों में भी खींचतान गारंटी लिखकर देना संभव नहीं “हमारे पास परफॉर्मा आया था, लेकिन हमने इसे भरकर नहीं दिया है। जिले के स्कूल सुरक्षित हैं, यह गारंटी के साथ लिखकर देना मुमकिन नहीं है।” -ननिहाल सिंह चौहान, एडीपीसी, समग्र शिक्षा अभियान, उदयपुर सरकार ने क्यों भरवाए, वही जाने “हमने सीबीईओ से सुरक्षा प्रमाण-पत्र भरवाकर आगे भेज दिए हैं। सरकार ने ये क्यों भरवाए, इसकी जानकारी नहीं है। जब सुरक्षित भवन होंगे, तभी अधिकारी इसे भरकर दे रहे हैं।” -प्रतिभा गुप्ता, सीडीईओ, उदयपुर “अधिकारियों से दबाव में लिखवा लेने से जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी। कई स्कूलों में बच्चे आज भी जर्जर भवनों में या बाहर बैठ रहे हैं।” -शेरसिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, पंचायती राज व माध्यमिक शिक्षक संघ