जयपुर मेट्रो-द्वितीय की सेशन कोर्ट ने विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपी ओसामा उर्फ अफाक की डिफॉल्ट बेल अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्रावली पर डिफॉल्ट जमानत का कोई प्रार्थना पत्र लंबित नहीं है। वहीं जांच की समय सीमा बढ़ाए जाने के बाद अभियुक्त को इस लाभ का अधिकार नहीं रहता। आरोपी के अधिवक्ता सादत अली ने कहा कि गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे होने पर भी एटीएस एटीएस ने आरोप पत्र पेश नहीं किया। जब न्यायालय ने जांच की समय सीमा बढ़ाई, तब आरोपी को सुनवाई का अवसर नहीं दिया। विरोध में विशिष्ट लोक अभियोजक सागर तिवारी ने दलील दी कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास पेश किया गया प्रार्थना पत्र पहले ही लौटाया जा चुका था और न्यायालय में कोई नई अर्जी लंबित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी यूएपीए के गंभीर केसों में कहा है सामान्य अपराधों के विपरीत जेल ही नियम है और जमानत एक अपवाद है। देश की अखंडता और सुरक्षा से जुड़े मामलों में जमानत के प्रावधान सख्त हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर कहा कि धारा 187 बीएनएनएस (पूर्व में धारा 167 CrPC) के तहत वैध प्रार्थना पत्र कोर्ट के समक्ष पेश नहीं है। आरोपी ने न तो समय सीमा बढ़ाने वाले आदेश को चुनौती दी और न ही निचली कोर्ट के अर्जी लौटाने के आदेश को। न्यायालय ने आईओ को जांच के लिए समय सीमा बढ़ाई थी, इसलिए डिफॉल्ट जमानत का प्रश्न ही नहीं होता।’ ओसामा को 5 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया था।