भास्कर न्यूज| टोंक प्रदेश में इस वर्ष मानसून की धीमी शुरुआत का असर अब बांधों के जलभराव पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गत वर्ष 18 जून तक मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय हो चुका था, जबकि इस बार मानसून जुलाई में प्रवेश करने के बावजूद अभी तक पूरे राज्य में पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। इसका सीधा असर प्रदेश के 693 बांधों में उपलब्ध जलराशि पर पड़ा है। जलसंसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष इन दिनों राज्य के बांधों में उनकी कुल क्षमता का 57.33 प्रतिशत पानी संग्रहित था, जबकि इस वर्ष यह घटकर 44.85 प्रतिशत रह गया है। यानी पिछले वर्ष की तुलना में इस समय बांधों में 12.48 प्रतिशत कम पानी उपलब्ध है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में टोंक सहित कई जिलों में अच्छी बारिश होने से बांधों में पानी की आवक शुरू हुई है। कई बांधों के जलस्तर में दो से पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन यह बढ़ोतरी अभी पिछले वर्ष के स्तर तक नहीं पहुंची है। राज्य में सबसे अधिक मेजर बांधों वाले टोंक जिले की स्थिति भी इसी तस्वीर को दर्शाती है। जिले के सिंचाई विभाग के अधीन 30 बांधों में गत वर्ष इस समय 62.70 प्रतिशत जलभराव था, जबकि इस वर्ष यह घटकर 41.89 प्रतिशत पर आ गया है। यानी जिले के बांधों में भी पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय कमी बनी हुई है।बारिश के आंकड़े भी यही संकेत दे रहे हैं। गत वर्ष इस समय तक टोंक जिले में सामान्य औसत वर्षा का 48.45 प्रतिशत पानी बरस चुका था, जिससे बांधों में लगातार आवक बनी हुई थी। इसके विपरीत इस वर्ष मानसून के देर से सक्रिय होने के कारण वर्षा का वितरण प्रभावित हुआ और अधिकांश बांधों में अपेक्षित जलभराव नहीं हो सका। अब मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है मानसून की देरी से बांधों में पानी कम हुआ है। यदि लगातार वर्षा होती है तो बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जिससे पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को भी राहत मिलेगी।