कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दो दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को टोंक विधानसभा क्षेत्र पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में पायलट ने राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तबादला नीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। कहा कि बिल्कुल, मुझे लगता है कि प्रतिशोध की भावना से तबादले किए जाते हैं। एक विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार काम कर रही है। यह बहुत गलत है। कोई नीति, कानून, मापदंड होने चाहिए। किस प्रकार आप ट्रांसफर कर रहे हैं। लेकिन राजनीतिक हित साधने के लिए कर्मचारियों का ट्रांसफर करें। प्रतिशोध की भावना, दुश्मनी की भावना से ट्रांसफर करते हैं। जनता बहुत दिनों तक बर्दाश्त नहीं करती। सरकार सबकी होती है। चुनाव के बाद जिम्मेदारियां होती हैं कि सरकार सबको साथ रखे। कर्मचारियों के साथ इस प्रकार दुश्मनी निकालना बहुत दुखदायी है। पहले ऐसा नहीं होता था। सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। यह बड़े दुख की बात है। पायलट ने कहा कि शिक्षा, चिकित्सा और कानून-व्यवस्था किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारियां होती हैं। राज्य सरकार इन तीनों मोर्चों पर पूरी तरह असफल साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल बड़े-बड़े आयोजनों और प्रचार में व्यस्त है। सचिन पायलट का सोहेला मोड़ पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सऊद सईदी सहित कई पदाधिकारियों ने स्वागत किया। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई : पायलट ने सोनम वांगचुक के जंतर-मंतर पर चल रहे अनशन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पिछले 19-20 दिनों से सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं। वह देश के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मुझे लगता है कि सरकार को उनकी मांग को गंभीरता से लेना चाहिए। जिस मुद्दे को लेकर वह अनशन कर रहे हैं, उस मुद्दे के साथ-साथ पूरी शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत है। पेपर लीक हुए। घोटाले हुए। चोरियां पकड़ी गईं। इन सबके विरोध में हमारी पूरी पार्टी ने राहुल गांधी के नेतृत्व में मुहिम छेड़ी है। कुछ दिन पहले कोटा में इस अभियान को शुरू किया था। उसी को लेकर राहुल गांधी उत्तराखंड के देहरादून गए हैं। लाखों-करोड़ों छात्र अपने आप को बड़ा वंचित महसूस करते हैं, जब व्यवस्था में विश्वास खत्म होता है। कोई जवाबदेही किसी की नहीं है। मुझे लगता है कि शिक्षा एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नौजवान पीढ़ी को भविष्य में आगे ले जाने के लिए यह जरूरी है। इसमें केंद्र सरकार को बिल्कुल भी चिंता नहीं है। न परवाह है। एथेनॉल नीति पर भी उठाए सवाल : एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दे पर पायलट ने कहा कि पर्याप्त तकनीकी तैयारी के बिना नीति लागू कर दी गई। वाहन कंपनियों को भी विश्वास में नहीं लिया गया। इससे लोगों के वाहनों के इंजन खराब होने और माइलेज कम होने की शिकायतें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी मानसून सत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, एथेनॉल नीति और अन्य जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। पीपलू । पायलट का स्वागत करते कार्यकर्ता।