धौलपुर के डकैत जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या कर दी गई। भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने जगन का गला घोंट दिया। साल 1994 में अपराध की दुनिया में आए जगन गुर्जर का तीन दशक से भी ज्यादा समय तक अपराध से नाता रहा। अपराध के शुरुआती दिनों में वारदात के बाद बीहड़ों में छिपने, दस्यु सुंदरी कोमेश से शादी करने और चार बार सरेंडर करने वाले जगन के अपराधों की लिस्ट काफी लंबी है। राजनीतिक रसूख और पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच जगन गुर्जर के सरेंडर और दोबारा अपराध की दुनिया में लौटने का सिलसिला लगातार चलता रहा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… धौलपुर के बसई डांग थाना क्षेत्र के भवुतीपुरा गांव का जगन गुर्जर साइकिल पर दूध बेचता था। 1994 में चोरी के आरोप में उसे बाड़ी सदर थाने में गिरफ्तार किया गया। बाहर आकर स्थानीय विवाद और रंजिश के चलते चंबल के बीहड़ों में छिपकर रहने लगा। हालांकि कुछ लोग बताते हैं कि मंदिर में प्रसाद वितरण विवाद के दौरान कुछ लोगों ने उसके पिता का अपमान कर दिया था। इसका बदला लेने के लिए वह अपराध की दुनिया में आया। जगन गुर्जर पर आठ लोगों की हत्या का आरोप है। जगन को खोया-पनीर की सब्जी पसंद थी। वारदात के बाद या खास मौकों पर वह यही खाया करता था। साल 1995 में जमीन विवाद को लेकर पूर्व डकैत मोहन गुर्जर ने जगन के जीजा का कत्ल कर दिया था। जगन ने मोहन गुर्जर की गैंग जॉइन की। 5 साल बाद मौका पाकर मोहन गुर्जर की हत्या कर दी और खुद उस गैंग का सरगना बन गया। जगन पर डांग क्षेत्र में पुलिसकर्मी की हत्या का भी आरोप है। तीन शादी की, दस्यु सुंदरी के लिए सरेंडर, पत्नी को चुनाव भी लड़वाया जगन गुर्जर ने तीन शादी की। पहली पत्नी कोमेश, दूसरी ममता और तीसरी मुकेश। उसके 4 बेटे और तीन बेटियां हैं। कोमेश बसई डांग क्षेत्र के नगर गांव के तत्कालीन सरपंच छितरिया की बेटी है। जब वह छोटी थी, तो उसके पिता छितरिया गुर्जर की हत्या कर दी गई। कोमेश इसका बदला लेना चाहती थी। वह जगन की गैंग में शामिल हो गई। बीहड़ में मुलाकात के बाद जगन ने उसे बंदूक थमाई। साल 2000 में वह बीहड़ में रहने के दौरान प्रेग्नेंट हो गई थी। ऐसे से अकेले ही हिंडौन सिटी पहुंच गई। नर्सिंग होम में एक बच्चे को जन्म दिया। नर्सिंग होम में ही कोमेश को पकड़ लिया गया। इसके बाद जगन इस कदर टूट गया कि 2001 में तत्कालीन धौलपुर एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने सरेंडर कर दिया था। साल 2008-09 की शुरुआत में कोमेश दोबारा प्रेग्नेंट हुई। तब बसई डांग थाना क्षेत्र के बंडपुरा गांव में धौलपुर के तत्कालीन एसपी विकास कुमार के नेतृत्व में पुलिस और जगन गुर्जर गैंग के बीच एनकाउंटर हुआ। कई घंटे तक मुठभेड़ चलती रही। इस दौरान जगन तो फरार हो गया, लेकिन कोमेश के पैर में गोली लगी। इसी एनकाउंटर में उसके गर्भ में पल रहे दूसरे बच्चे की मिसकैरेज के चलते मौत हो गई। कोमेश को पीलिया हो गया। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बाद में जगन गुर्जर ने भी 30 जनवरी 2009 को करौली कैमरी गांव में जगदीश नारायण के मेले में सचिन पायलट के सामने सरेंडर कर दिया था। साल 2017 में हुए धौलपुर विधानसभा उपचुनाव में जगन गुर्जर ने पत्नी ममता को निर्दलीय चुनाव लड़वाया। ममता को केवल 112 वोट मिले थे और जमानत जब्त हो गई थी। बीड़ी लेने के विवाद से फिर बना अपराधी करीब 80 केस में बरी होने के बाद जगन गुर्जर सामान्य जिंदगी जी रहा था। 12 जून 2019 को बाड़ी के पुराना बस स्टैंड पर उसका एक दुकानदार से बीड़ी लेने को लेकर विवाद हो गया। जगन और दुकानदार के बीच हाथापाई हो गई। रात को जगन वहां से चला गया। सुबह लोगों ने दुकानदार को बताया कि जिसके साथ उसकी हाथापाई हुई है, वह कुख्यात डकैत जगन गुर्जर है। उस व्यक्ति ने दुकान नहीं खोली। जगन उसी चौराहे पर गया और फायरिंग कर दी। मौके पर पुलिस पहुंची तो वह स्कॉर्पियो लेकर फरार हो गया। आगे बसेडी टोल नाके पर टोलकर्मियों ने उसे रोकने का प्रयास किया तो उसने टोल नाके पर तोड़फोड़ की और फरार हो गया। उसी दिन दोपहर ढाई-तीन बजे के करीब वह डांग इलाके के सोने का गुर्जा गांव में पहुंचा और मुखबिरी के शक में एक आदमी की पिटाई की। महिलाओं को निर्वस्त्र करने के आरोप 12 जून 2019 की रात को ही वह करनसिंह का पुरा सायपुर गांव पहुंचा। यहां उसका बीदाराम नाम के शख्स से विवाद था। बीदाराम तो नहीं मिला, लेकिन दहशत फैलाने के लिए उसने महिलाओं से मारपीट की। आरोप लगे कि उसने गांव की कुछ महिलाओं को निर्वस्त्र करके घुमाया था। ये मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया। पुलिस पीछे लगी तो 28 जून 2019 को बाड़ी सदर थाना इलाके के बाबू महाराज मंदिर में एसपी अजय सिंह के सामने सरेंडर कर दिया। इस दौरान मीडिया ने उससे सवाल किया कि तुमने महिलाओं को निर्वस्त्र क्यों किया? जगन का जवाब था कि ‘इल्जाम तो कोई भी लगा सकता है। मैं कायर नहीं हूं, किसी को भी मार सकता हूं, लेकिन महिलाओं को निर्वस्त्र नहीं किया। यह सब झूठ है।’ चार बार सरेंडर किया, एके-47 बरामद नहीं हो पाई डकैत जगन गुर्जर अपने साथ एके-47 जैसे आधुनिक हथियार रखता था। उसने कुल चार बार सरेंडर किया, लेकिन एक बार भी पुलिस उससे एके-47 बरामद नहीं करवा सकी। उसने हमेशा पचफेरा (पांच गोलियों वाली पिस्टल) के साथ सरेंडर किया। जगन गुर्जर ने साल 2001 में पहली बार धौलपुर के तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने सरेंडर किया। साल 2008 में पीलूपुरा में चल रहे गुर्जर आंदोलन के दौरान जगन ने धौलपुर पैलेस को उड़ाने की धमकी देकर सुर्खियां बटोरी थी। सरकार ने उसके ऊपर इनाम बढ़ाकर 11 लाख रुपए कर दिया था। उस दौरान कुछ मीडियाकर्मियों की मध्यस्थता से 30 जनवरी 2009 को करौली कैमरी गांव में जगदीश नारायण के मेले में सचिन पायलट के सामने सरेंडर कर दिया था। 19 अगस्त 2018 को भरतपुर की तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने सरेंडर किया। चौथी बार जून 2019 में तत्कालीन धौलपुर एसपी डॉ. अजय सिंह के सामने सरेंडर किया। तत्कालीन विधायक को दी थी बिना सिक्योरिटी आने की चुनौती 22 जनवरी 2022 को जगन गुर्जर ने धौलपुर के बाड़ी से तत्कालीन कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को गाली देते हुए धमकी दी थी। जगन ने कहा था- 2 घंटे के लिए पुलिस सिक्योरिटी हटाकर मेरे सामने आ। पुलिस ने इस मामले में जगन पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। पुलिस ने 17 दिन करीब 200 गांवों में दबिश देकर करौली से जगन को गिरफ्तार किया था। जगन गुर्जर की हत्या से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… डकैत जगन गुर्जर के परिजनों का धरना:पुलिस को चेतावनी- जब तक CBI जांच नहीं, शव नहीं लेंगे; हत्याकांड में जेलकर्मियों के बयान लिए पहला डाकू जिसकी संसद में उठी थी एनकाउंटर की मांग:दर्जनों मर्डर करने वाला 3 रुपए के लिए झगड़ पड़ा बहन पर टिप्पणियां करता था जगन, इसलिए मार डाला:मुस्कुराते हुए सेल से बाहर निकला हत्यारा विष्णु; मर्डर से पहले साथ बैठकर खाना खाया 15 साल पुराने विवाद में हुई डकैत जगन की हत्या:भरतपुर की जेल से हत्याकांड का कनेक्शन, शव के पास आराम करता रहा विष्णु डकैत जगन के मर्डर से पहले आखिर क्या हुआ था?:सेल में 15 से ज्यादा कैदी थे, लेकिन किसी ने कोई आवाज नहीं सुनी अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या:कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी ने तौलिए से गला घोंटा, साथ में लूडो खेला था