डीडवाना में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली, अधिकारियों की उदासीनता और लंबित मांगों के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। महासंघ का आरोप है कि लगातार संवाद के बावजूद शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा, जिससे प्रदेशभर के शिक्षकों में आक्रोश है। जिलाध्यक्ष कैलाश सोलंकी ने बताया कि प्रदेश संगठन के आह्वान पर यह आंदोलन 14 मई से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद संगठन ने नियमित वार्ताओं के माध्यम से शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन सरकार और अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है। मांगों को लेकर की चर्चा जिला मंत्री पवन कुमार जोशी के अनुसार, संगठन ने शिविरा पंचांग में संशोधन, ग्रीष्मकालीन अवकाश में वृद्धि, तृतीय श्रेणी सहित सभी संवर्गों के स्थानांतरण, पदोन्नति, क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति, स्टाफिंग पैटर्न लागू करने, आरजीएचएस (RGHS) व्यवस्था को सुचारू रखने, वेतन विसंगति दूर करने और संविदा शिक्षकों को नियमित करने जैसी मांगों पर लगातार चर्चा की। हालांकि इन वार्ताओं के सकारात्मक परिणाम नहीं मिले। आंदोलन चरणबद्ध रूप से चलेगा जिला संगठन मंत्री भगवान सिंह राठौड़ ने आंदोलन के चरणबद्ध कार्यक्रम की जानकारी दी। इसके तहत 14 मई को खंड स्तर पर, 29 मई को जिला स्तर पर और 5 जून को बीकानेर निदेशालय पर संभाग स्तरीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 10 जून को जयपुर में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जाएगा। 18 जून से प्रदेश स्तरीय क्रमिक धरना शुरू होगा और मानसून सत्र में विधानसभा घेराव भी किया जाएगा। महासंघ ने शिक्षा विभाग पर "नवाचार" के नाम पर शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि वर्तमान नीतियां शिक्षक और विद्यार्थी दोनों को प्रभावित कर रही हैं। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने शीघ्र मांगों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा।