हनुमानगढ़ के सहजीपुरा निवासी 82 वर्षीय दिलबाग सिंह ने मौत के बाद अपनी देह चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए दान कर समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव देह इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज कॉलेज, नोएडा को सौंपी। इस देहदान के साथ वे सहजीपुरा क्षेत्र के 12वें देहदानी बन गए। वहीं, बेटियों, पुत्रवधुओं, पौत्रियों और पड़पौत्री ने अर्थी को कंधा देकर 'बेटा-बेटी एक समान' का संदेश भी दिया। जीवनकाल में लिया था देहदान का संकल्प परिजनों ने बताया कि दिलबाग सिंह ने जीवनकाल में ही देहदान का संकल्प लिया था। निधन के बाद परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज को सौंप दी। बेटियों ने निभाया अंतिम दायित्व अंतिम यात्रा के दौरान 'बेटा-बेटी एक समान' की भावना को साकार करते हुए बेटियां अमरजीत कौर और चरणजीत कौर, पौत्रियां स्वर्णजीत कौर और रमनदीप कौर, पड़पौत्री सफरीत कौर तथा पुत्रवधुएं निर्मल कौर और देवेंद्र कौर ने अर्थी को कंधा दिया। इस भावुक दृश्य ने समाज के सामने समानता और पारिवारिक जिम्मेदारी का संदेश रखा। ग्रामीणों और अनुयायियों ने दी श्रद्धांजलि देहदान यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, समाज के लोग शामिल हुए। गुरजीत सिंह ने बताया कि उनके पिता का मानना था कि मौत के बाद भी शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के माध्यम से समाज के काम आ सकता है। सहजीपुरा के 12वें देहदानी बने परिजनों ने बताया कि दिलबाग सिंह से पहले सहजीपुरा क्षेत्र में 11 लोग देहदान कर चुके हैं।