राजस्थान के रियासतकालीन प्राचीन और भव्य सरकारी 253 मंदिरों की जमीनों पर भूमाफिया काबिज हो गए हैं। ये जमीनें छोटे आकार की नहीं बल्कि करीब 1200 बीघा से अधिक जमीनों पर लोगों ने कब्जे कर लिए। मंदिर माफी की और सरकारी मंदिरों की जमीनों पर कब्जों को लेकर मुख्य सचिव वी श्रीनिवास को मिली रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ। इस रिपोर्ट के अनुसार 1775 से अधिक माफिया ने सरकारी मंदिरों की अरबों की जमीनों पर कब्जे कर दिए हैं। उनको हटाने के प्रयास हुए लेकिन कब्जे नहीं हटे। अब सारे मंदिरों का फिर से जमीनी सर्वे कराने, मंदिरों की सूची फिर से तैयार करने का प्लान बन रहा है। इसके अगले 3 माह में इम्प्लीमेंट किया जाएगा। सरकार मंदिरों की जमीनों से अभियान चलाकर कब्जे हटवाएंगी। पीला पंजा चलाया जाएगा। मंदिरों की जमीनों के 46% हिस्से पर कब्जे सरकार को मिली रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि सरकारी मंदिरों के नाम दर्ज कुल जमीनों में से 46 प्रतिशत पर अतिक्रमी काबिज हो चुके हैं। सबसे अधिक सबसे अधिक अतिक्रमण अजमेर और टोंक में सामने आए। विधानसभा को मिली रिपोर्ट के अनुसार जो राज्य में दर्ज कुल अतिक्रमित मंदिर भूमि का लगभग 46.6 प्रतिशत है। अजमेर जिले के किशनगढ़ स्थित श्री मदनमोहनजी मंदिर की कुल 1094 हेक्टेयर भूमि में से 1070.10 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण है। मंदिर के पास स्वयं के उपयोग के लिए मात्र 24.4 हेक्टेयर भूमि बची है। इसी प्रकार टोंक जिले के टोडारायसिंह स्थित श्री भूतेश्वरजी मंदिर की 619.13 हेक्टेयर भूमि पर भी अवैध कब्जा दर्ज है। आगे क्या.... मंदिरों को चिह्नित कर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे देवस्थान मंत्री के अनुसार देवस्थान विभाग मंदिरों की कृषि भूमि पर अतिक्रमियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के साथ मंदिर की जमीनों का संरक्षण करेगा। मंदिरों में जहां बोर्ड नहीं है वहां बोर्ड लगाए जाएंगे। अतिक्रमण से मुक्त परिसंपत्तियों को चिह्नित करंगे। प्रमुख मंदिरों को चिह्नित कर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।