भास्कर न्यूज | बाड़मेर हस्तशिल्प कला के संरक्षण व संवर्धन को लेकर रविवार को कलेक्टर चिन्मयी गोपाल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट में बैठक हुई। बैठक में कलेक्टर ने इसके लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। बैठक में जिला प्रशासन, राजीविका बाड़मेर, राज्य स्तरीय नॉन-फार्म व नॉलेज वर्टिकल की टीम शामिल रही। महिला शिल्पकार भी मौजूद रही। राज्य स्तरीय टीम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस से विस्तृत चर्चा हुई। पहले चरण में जिला कलेक्टर ने जिला परियोजना प्रबंधक, जिला राजीविका टीम, प्रोजेक्ट मैनेजर्स से बाड़मेर की पारंपरिक एप्लिक कला की मौजूदा स्थिति, उपलब्धियां, संभावनाएं, भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी ली। विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की। इसके बाद कलेक्टर ने राजीविका से जुड़ी महिला शिल्पकारों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से सीधे संवाद किया। उनके अनुभव, चुनौतियां, सुझाव सुने। चर्चा में उत्पाद की गुणवत्ता, डिजाइन नवाचार, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार तक पहुंच, मूल्य संवर्धन, आजीविका के नए अवसरों पर विचार हुआ। बाड़मेर की पारंपरिक एप्लिक कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर भी चर्चा हुई। महिला शिल्पकारों की आय बढ़ाने के उपायों पर बात हुई। डिजिटल व ऑनलाइन मार्केटिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, अन्य डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा हुई। उद्देश्य स्थानीय हस्तशिल्प को देश-विदेश के ग्राहकों तक पहुंचाना रहा। कलेक्टर चिन्मयी गोपाल ने महिला शिल्पकारों के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन हर संभव सहयोग देगा। उन्होंने विभागों और राजीविका टीम को समन्वय कर संरक्षण, प्रचार-प्रसार, विपणन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में राजीविका के जिला परियोजना प्रबंधक नरपत सिंह भाटी, जिला प्रबंधक दिनेश सैन, अशोक सोनल, वाईपी देवेश त्रिपाठी, राजा कौरव मौजूद रहे। राजीविका हस्तकला की आर्टिजन वखतू देवी, मोनिका, कविता चौहान भी उपस्थित रही। मिलेट बिस्किट प्रोडक्शन करने वाले स्वयं सहायता समूह की सदस्य हेमलता व पुष्पा भी बैठक में रही। बाड़मेर. कलेक्ट्रेट में बैठक के दौरान हस्तकला का प्रदर्शन करते हुए।