जिला अस्पताल इन दिनों मरीजों के लिए राहत की जगह आफत का केंद्र बन गया है। पिछले कुछ दिनों से यहां पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को इलाज से पहले रास्तों की भूलभुलैया और ट्रैफिक जाम से गुजरना पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण अस्पताल प्रशासन की ओर से राजनीतिक दबाव में लिया गया एक फैसला है। दशकों से आम जनता की सहूलियत के लिए खुला रहने वाला सेवा सदन और बाल मंदिर उमावि के बीच का आम रास्ता एक दीवार चुनवाकर बंद कर दिया गया है। सरकारी कागजों में आज भी दर्ज इस आम रास्ते को भविष्य में भी न खोला जा सके, इसके लिए वहां डिस्कॉम के ट्रांसफार्मर तक फिट करवा दिए गए हैं। कुछ महीने पहले अस्पताल में प्रवेश के लिए चार रास्ते हुआ करते थे, जिससे ट्रैफिक का दबाव बंट जाता था और आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस बिना किसी बाधा के सीधे इमरजेंसी वार्ड तक पहुंच जाती थी, लेकिन अब हालात उलट बने हुए हैं। चौतरफा चक्रव्यूह में फंसे मरीज : इन दिनों मुख्य मार्ग पर सीसी रोड का निर्माण कार्य चलने के कारण अस्पताल के दो मुख्य द्वारों में से एक बंद है। सारा लोड एक ही गेट पर आने से एम्बुलेंस तक जाम में फंस रही हैं। इस बंद रास्ते के कारण मरीजों को गर्ल्स कॉलेज और विश्वकर्मा सर्किल से होते हुए तथा सीएमएचओ कार्यालय के चक्कर काटकर पहुंचना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या का एकमात्र और त्वरित समाधान यही है कि कलेक्टर और अस्पताल प्रशासन तुरंत मामले पर संज्ञान लें। सरकारी कागजों के नियमों के अनुसार कार्रवाई करते हुए सेवा सदन और बाल मंदिर के बीच खड़ी की गई इस अवैध दीवार को तुरंत ध्वस्त किया जाए। साथ ही डिस्कॉम को पाबंद कर वहां लगाए गए ट्रांसफार्मर को किसी अन्य सुरक्षित और गैर-बाधित स्थान पर शिफ्ट करवाया जाए।