नमस्कार, सवाल विकास का उठा तो अजमेर में पूर्व हेल्थ मिनिस्टर आहत हो गए, फिर गिना दी कामों की फेहरिस्त। जयपुर में विधायकजी इलाके का हाल जानने निकले तो महिलाओं ने घेर लिया। उदयपुर में क्रांतिकारी डॉक्टर साहब ने लैब के खिलाफ पोल खोल अभियान चला दिया और नागौर की डिजिटल प्याऊ चर्चा में है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. हमारा नेता कैसा हो… पूर्व हेल्थ मिनिस्टर अपने क्षेत्र में अपने लोगों के बीच थे। पिछले विधानसभा चुनाव में पटखनी खाई थी। इसलिए घायल थे। लिहाजा घातक नजर आ रहे थे। कहीं से उड़ते हुए विकास का सवाल सभा में उछल गया। गुस्से का यह चरम था। पूर्व मिनिस्टर ने पलटवार किया। बोले- ….मैंने तो विकास किया ही नहीं। सभा में सन्नाटा। इसके बाद पूर्व मंत्रीजी ने अपने कामों को सवाल की शक्ल में जनता की तरफ उछालना शुरू किया। जनता जवाब देती रही। पूर्व मंत्रीजी बोले- एनआरसी कॉलेज किसने बनाया? सभा का जबाव आया- रघु शर्मा ने। पूर्व मंत्री बोलते रहे- एग्रीकल्चर कॉलेज किसने बनाया? आयुर्वेद कॉलेज किसने बनाया? होम्योपैथी कॉलेज किसने बनाया? यहां कॉलेज किसने बनाया? वहां कॉलेज किसने बनाया? फलां कॉलेज किसने बनाया..? सभी सवालों का एक ही जवाब कोरस में मिला- रघु शर्मा ने। नेताजी ने माहौल ऐसा बनाया कि रघु शर्मा जिंदाबाद हो गए। इसके बाद जनता ने जनता से सवाल किया- हमारा नेता कैसा हो? जनता ने जवाब दिया- रघु शर्मा जैसा हो। यही माहौल चुनाव से पहले बनाना चाहिए था। शायद पूर्व मंत्रीजी ने अगले चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। 2. विधायकजी को महिलाओं ने घेर लिया जनता कीचड़ और सीवर से गुजर रही थी। आंदोलन कर रही थी। एक महीने तक लोग परेशान रहे। इसके बाद आंदोलन पर उतर आए। आखिरकार विधायकजी सिविल लाइंस से सुशीलपुरा पहुंचे। इलाके की समस्याएं सुनाने महिलाएं आगे आईं। मातृशक्ति ने रेलगाड़ी ही चला दी। विधायकजी चुपचाप खड़े सुनते रहे। महिलाएं बोलीं- मंदिर में सीवर का पानी चला गया। एक महीना हो गया सरकार…एक महीना। लोग कपड़े ऊपर करके चले जाते थे, बोलता कोई नहीं था। हमने आवाज उठाई। विधायकजी हां-हूं करते हुए आगे बढ़े। 3. डॉक्टर साहब ने खोली लैब की पोल
उदयपुर के डॉक्टर साहब बेहद क्रांतिकारी हैं। वे इलाज करने के साथ-साथ रील भी बनाते हैं। मरीजों के साथ रील बनाने के चक्कर में उन्हें राजधानी तलब कर लिया गया था। उनके मरीज ही नहीं बल्कि इलाके के लोग भी उनके तगड़े फैन और फॉलोअर हैं। साहब जयपुर जा रहे थे तो पूरा गांव रोने लगा था। आंसुओं की नदियां बह निकली थीं। साहब के लिए लोगों का क्रेज देख उन्हें फिर से उसी हॉस्पिटल भेज दिया गया जहां से तलब किया गया था। डॉक्टर साहब फिर क्रांति में लग गए हैं। बच्चों को A ग्रेड लाने के लिए प्रेरित करते हैं। हॉस्पिटल में लैब की थर्ड ग्रेड व्यवस्था को उजागर किया तो लैब संचालक ताला मारकर फरार हो गए। डॉक्टर साहब का मसीहा अवतार देखना हो तो रीलें देख लीजिए। एक्सरे-बीड़ी, प्लास्टर-पर्वत, पर्ची-संस्कृति, एक्सीडेंट-बंधुत्व, बीपी-कल्चर, अमीरी-गरीबी, टोना-टोटका, दया-सहानुभूति, उपकार-धर्म सब विषयों पर रील बना चुके हैं। 4. चलते-चलते.. ईरान का युद्ध कब खत्म होगा कहा नहीं जा सकता। ठीक उसी तरह जैसे ये नहीं कहा जा सकता कि पंचायत चुनाव कब शुरू होंगे। इस बीच दानादाताओं के सहयोग से नागौर के कालड़ी गांव के लोगों ने चौराहे पर डिजिटल प्लाऊ बना दी। रंग-बिरंगी देसी पोशाक में एक नवयुवक इधर से गुजरा तो पानी पीने डिजिटल प्याऊ पर पहुंच गया। उसने खुशी का इजहार किया और वीडियो बनाया। बोला- अपने नागौर के गांव भी डिजिटल हो गए हैं। हाथ नल के नीचे करते ही पानी आ रहा है। बोतल लगाई और पानी शुरू। उसने मौजूदा सरपंचों का जिक्र करते हुए कहा- ये वीडियो सरपंचों को टैग करो और बोलो कि इस बार सरपंच बनना है तो ऐसी टोंटी गांव में लगानी पड़ेगी। इनपुट सहयोग- भरत मूलचंदानी (अजमेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..