जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) ने जिले के बाल शिशु गृहों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुविधाओं की गहन जांच की गई, जिसके बाद अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए। यह निरीक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, डूंगरपुर के सचिव मनोज मीणा के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय बहु-विषयक टीम द्वारा किया गया। टीम में वरिष्ठ विशेषज्ञ मनोचिकित्सक डॉ. अमृत गोसाई, शिशु एवं बाल रोग सहायक आचार्य डॉ. पवन मीणा और सार्वजनिक निर्माण विभाग की सहायक अभियंता इशानी मीणा शामिल थीं। टीम ने संस्थानों का चिकित्सकीय, मनोवैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर व्यापक मूल्यांकन किया। टीम ने राजस्थान बाल कल्याण समिति, बालिका गृह सागवाड़ा, पल्लव संस्थान नन्दौड, राजकीय बालक गृह तीजवड़ और मुस्कान संस्थान (बालक एवं बालिका गृह) का आकस्मिक दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान, टीम ने संस्थानों के बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था (सीसीटीवी सहित), बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड की गहन जांच की। सचिव मनोज मीणा और मनोचिकित्सक डॉ. अमृत गोसाई ने बच्चों से बिना किसी स्टाफ की उपस्थिति के गोपनीय बातचीत की। उन्होंने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, देखभाल और पुनर्वास की स्थिति का आकलन किया। वहीं, डॉ. पवन मीणा ने बच्चों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अभिलेखों की जांच की, जबकि इशानी मीणा ने भवन की सुरक्षा एवं क्षमता का तकनीकी मूल्यांकन किया। निरीक्षण के दौरान सभी सुविधाओं के जियो-टैग्ड फोटोग्राफ भी लिए गए, जिससे रिपोर्ट को अधिक सटीक बनाया जा सके। निरीक्षण टीम द्वारा तैयार विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर संबंधित संस्थानों की ग्रेडिंग की जाएगी।