डूंगरपुर जिले का कांठडी बांध जल संसाधन विभाग की कथित अनदेखी के कारण बदहाली का शिकार है। बांध की नहर की कोठी में सीपेज होने से हजारों लीटर पानी लगातार व्यर्थ बह रहा है, जिससे बांध के खाली होने का खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही, बांध की पाल पर उग आए बड़े-बड़े विलायती बबूल भी इसकी संरचना के लिए खतरा बन गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बांध की भराव क्षमता 8.50 मीटर है और यह पांच साल के लंबे इंतजार के बाद पिछली बारिश में ओवरफ्लो हुआ था। हालांकि, अब विभाग की लापरवाही के कारण यह पानी खेतों में सिंचाई के काम आने के बजाय बेकार बह रहा है। नहर की कोठी के गेट सही ढंग से बंद न होने या खराब होने के कारण पानी का रिसाव जारी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विभाग ने नहर की मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की और मुख्य गेट की मरम्मत के बजाय केवल दीवारों पर प्लास्टर कर दिया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बांध की पाल पर बड़े-बड़े विलायती बबूल उग आए हैं। इन बबूलों की जड़ें पाल को भीतर से खोखला कर रही हैं, जिससे मानसून के दौरान बांध के टूटने या किसी बड़े हादसे का अंदेशा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह पानी बहता रहा, तो गर्मी के मौसम में मवेशियों के लिए पीने के पानी की भारी किल्लत हो जाएगी। उन्होंने जल संसाधन विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि बांध की देखरेख की जिम्मेदारी उन्हीं की है। ग्रामीणों ने अधिकारियों को बार-बार इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने बारिश का मौसम शुरू होने से पहले पाल की सफाई और गेट की मरम्मत की मांग की है।