डूंगरपुर में राजस्थान नर्सेज संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सोमवार को नर्सिंग अभ्यर्थियों और विभिन्न योजनाओं के तहत कार्यरत नर्सिंग कार्मिकों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने नेहरू पार्क से कलेक्ट्रेट तक रैली निकाली और नारेबाजी की। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में एनएचएम, यूटीबी, संविदा, प्लेसमेंट एजेंसी और अन्य योजनाओं में हजारों नर्सिंग कार्मिक वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना महामारी जैसी विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं। हालांकि, नियमित भर्ती न होने के कारण अनुभवी नर्सिंग कार्मिक और योग्य अभ्यर्थी आज भी बेरोजगारी और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। 19 हजार पदों पर भर्ती की है मांग प्रदर्शनकारियों ने राजस्थान चिकित्सा सेवा नियम-1965 के तहत नर्सिंग ऑफिसर के 12 हजार और एएनएम के 7 हजार पदों पर शीघ्र नियमित भर्ती की मांग की। यह भर्ती अनुभव आधारित मेरिट और 10, 20 व 30 बोनस अंकों के आधार पर करने की बात कही गई। इसके अलावा उन्होंने टीएसपी (जनजातीय उप-योजना) क्षेत्र के लिए नर्सिंग ऑफिसर के 4 हजार और एएनएम के 2 हजार नए पद स्वीकृत करने की मांग की। साथ ही, पूर्व में समाप्त किए गए पदों की भरपाई करने की भी मांग उठाई गई। आंदोलन को तेज करने की चेतावनी संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि नर्सिंग ऑफिसर सीधी भर्ती-2023 में टीएसपी क्षेत्र के लिए एक भी पद निर्धारित नहीं किया गया था, जिससे हजारों स्थानीय अभ्यर्थी अवसर से वंचित रह गए। उन्होंने आगामी भर्ती में टीएसपी क्षेत्र के लिए अलग और पर्याप्त पद निर्धारित करने पर जोर दिया। अन्य मांगों में सीएसआर भर्ती प्रक्रिया के दौरान कार्यमुक्त किए गए नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिकों की सेवा बहाल करना, राज्यभर के अस्पतालों में रिक्त नर्सिंग पदों को प्राथमिकता से भरना और संविदा तथा विभिन्न योजनाओं में कार्यरत नर्सिंग कार्मिकों के अनुभव को भविष्य की नियमित भर्तियों में बोनस अंक के रूप में मान्यता देना शामिल है। प्रदर्शन के बाद, संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।