डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा में जल संसाधन विभाग की जमीन की सार्वजनिक नीलामी की गई। यह कार्रवाई उदयपुर कमर्शियल कोर्ट के आदेश पर हुई, क्योंकि विभाग ने कोर्ट के आदेशों के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं कराई थी। नीलामी में करीब 1200 वर्गफीट जमीन 61 लाख रुपए की सर्वाधिक बोली पर बिकी। यह मामला वर्ष 2013 में लोडेश्वर बांध की ऊंचाई बढ़ाने के कार्य से जुड़ा है। जल संसाधन विभाग ने बांध के निर्माण के लिए एक निजी फर्म को ठेका दिया था, लेकिन निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया। इसके बाद यह मामला कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट ने बकाया चुकाने का दिया था आदेश वसूली प्रकरण में उदयपुर स्थित कमर्शियल कोर्ट ने एससीएल इंफ्राबिल्ड लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने जल संसाधन विभाग को किए गए कार्य की बकाया राशि, ब्याज और वाद व्यय का भुगतान करने का आदेश दिया था। न्यायालय ने विभाग को 14 जुलाई तक करीब 19.53 लाख रुपए की डिक्री राशि जमा कराने के निर्देश दिए थे, साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि निर्धारित समय तक राशि जमा नहीं होने पर विभाग की संपत्ति की सार्वजनिक नीलामी की जाएगी। कोर्ट के आदेश पर हुई नीलामी विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा में राशि जमा नहीं कराने पर शुक्रवार को सागवाड़ा स्थित जल संसाधन विभाग के कार्यालय परिसर की करीब 1200 वर्गफीट जमीन की नीलामी की गई। इसमें 61 लाख रुपए की सबसे ऊंची बोली लगी। जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता (एईएन) मोहित पाटीदार ने बताया कि वर्ष 2013 में लोडेश्वर बांध की ऊंचाई बढ़ाने के लिए टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन संबंधित कंपनी ने बीच में काम बंद कर दिया था। पाटीदार के अनुसार, बाद में कमर्शियल कोर्ट ने बकाया राशि ब्याज सहित चुकाने के आदेश दिए थे। विभाग द्वारा समय पर भुगतान नहीं किए जाने के कारण न्यायालय के निर्देशानुसार नीलामी की कार्रवाई की गई। जिले में सरकारी विभाग की संपत्ति की कोर्ट के आदेश पर हुई यह नीलामी चर्चा का विषय बनी रही।