राज्य के 13 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी व पेंशनर्स वित्तीय कुप्रबंधन का शिकार हो रहे हैं। राज्य के हर माह रिटायर हो रहे 1500 से 2000 कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के दिन पेंशन परिलाभ नहीं दिए जा रहे। पेंशन परिलाभ और ग्रेच्युटी का भुगतान 4 माह में भी नहीं हो पा रहा। सरेंडर लीव पर तो वित्त (बजट) ने अघोषित रोक ही लगा रखी है। वहीं, कर्मचारी को खुद की जमा जीपीएफ और बीमा की राशि भी समय पर नहीं मिल पा रही। यही नहीं, कर्मचारी सरकार से लोन लेकर तो उसका ब्याज भी चुकाता है, लेकिन वह भी 3 से 4 माह देरी से मिल रहा है। 2.5 लाख कर्मियों को सरेंडर लीव नहीं असल में नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से राज्य के कर्मचारियों को उनके हक की राशि मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के करीब ढाई लाख से अधिक कर्मचारियों को सरेंडर लीव की राशि नहीं मिल रही है। यह वह राशि है जो कर्मचारी को अवकाश के बदले मिलती है। डायरेक्टर बजट का कहना है कि सरेंडर लीव की राशि पर फिलहाल बातचीत चल रही है। ऐसी स्थिति में उसमें देरी हो रही है। हर महीने 1500 से 2000 कर्मचारी रिटायर, परिलाभ मिलने में 6 महीने लग रहे राज्य में प्रतिमाह 1500 से 2000 कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं। सरकार ने नियम बना रखा है कि जिस दिन कर्मचारी सेवानिवृत्त हो, उसी दिन उसके सेवानिवृत्ति परिलाभ की राशि उसके खाते में जमा हो जानी चाहिए। इसके बावजूद ऐसा नहीं हो रहा। बताया जा रहा है कि ये परिलाभ मिलने में 3 से 6 माह का समय लग रहा है। पेंशन परिलाभों में कम्यूटेशन, ग्रेच्युटी, समर्पित अवकाश सहित जीपीएफ-स्टेट इंश्योरेंस कर राशि का अंश भी शामिल होता है। यूं अटक रही खुद की ही राशि महासंघ ने कहा- अपना ही पैसा नहीं ले पा रहे हैं कर्मचारी, ऐसा होना गंभीर “पेंशन परिलाभ सेवानिवृत्ति के दिन ही मिलने के बजाय सामान्यतः 4 महीने विलंब से मिल रहा है। जीपीएफ और राज्य बीमा का तो कर्मचारी का स्वयं का जमाधन होता है, उसका भी सरकार विलंब से ही भुगतान कर रही है। लाखों कर्मचारियों का उपार्जित अवकाश के नकदीकरण के बिल एक अप्रैल से बकाया पड़े हैं। यह गंभीर स्थिति है।” -देवेंद्र सिंह नरूका, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष, राजस्थान राज्य कर्मचारी से युक्त महासंघ एकीकृत डायरेक्टर बजट ने कहा- भुगतान पैटर्न में बदलाव नहीं, सरेंडर लीव पर फैसला जल्द होगा “किसी भी प्रकार की राशि के भुगतान में देरी नहीं हो रही है। आमतौर पर जिस तरह का भुगतान का पैटर्न है, उसी के अनुरूप भुगतान किया जा रहा है। भुगतान में देरी संबंधी कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। सरेंडर लीव में देरी पर मामला विचाराधीन है। उस पर जल्द फैसला होने जा रहा है।” -बृजेश किशोर शर्मा, डायरेक्टर बजट, वित्त विभाग