टोंक| विश्व अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस पर शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की ओर से जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी) में विधिक जागरूकता कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में प्रशिक्षु शिक्षकों और बीएसटीसी विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय न्याय, मानवाधिकार, संविधान, विधि के शासन और न्याय तक समान पहुंच से जुड़े विषयों पर जानकारी दी गई। निशुल्क विधिक सहायता के अधिकारों और उपलब्ध सेवाओं पर भी चर्चा हुई। डीएलएसए सचिव (एडीजे) दिनेश कुमार जलुथरिया ने बताया कि 17 जुलाई 1998 को रोम संविधि अपनाए जाने की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है। इसी के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) की स्थापना का रास्ता बना। उन्होंने कहा कि न्याय केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर का विषय नहीं है। हर नागरिक को समय पर, सुलभ और निष्पक्ष न्याय मिलना जरूरी है। जलुथरिया ने बताया कि नालसा, सालसा और डीएलएसए कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को निशुल्क विधिक सहायता, कानूनी परामर्श और लोक अदालतों के जरिए त्वरित विवाद निस्तारण की सुविधा देते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से शिक्षक बनने के बाद समाज में विधिक जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों को न्याय व्यवस्था से जोड़ने की बात कही। उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सहायता हेल्पलाइन 15100 की जानकारी भी दी। पैनल अधिवक्ता राजेश सिसोदिया ने कानून के शासन को लोकतंत्र की प्रमुख ताकत बताया। सहायक विधिक सेवा प्रतिरक्षा अधिवक्ता बुधराम चौधरी ने निशुल्क विधिक सहायता लेने की प्रक्रिया, लोक अदालत, मध्यस्थता और वैकल्पिक विवाद निस्तारण की उपयोगिता पर जानकारी दी। कार्यक्रम में डीआईईटी प्रभारी पीयूष शर्मा सहित प्रशिक्षु शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे। डीएलएसए के अनुसार, राष्ट्रीय विधिक सहायता हेल्पलाइन 15100 पर संपर्क कर पात्र नागरिक निशुल्क कानूनी परामर्श और सहायता ले सकते हैं। प्राधिकरण के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोग, महिलाएं, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांग और पात्र वर्गों को नि:शुल्क अधिवक्ता, कानूनी सलाह, लोक अदालत और मध्यस्थता जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।