सुलभ इंटरनेशनल की ओर से संचालित नई दिशा कार्यक्रम के तहत सोमवार को वाल्मिकी समाज की महिलाओं के बनाए उत्पादों की प्रदर्शनी और मेले का आयोजन हुआ। मेले के साथ महिलाओं को कंप्यूटर की बेसिक शिक्षा और मोबाइल संचालन का प्रशिक्षण भी शुरू किया गया। सुलभ इंटरनेशनल की कार्यकारी संयोजक नित्या पाठक ने कहा कि नई दिशा केवल मेला नहीं है। यह महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान, आर्थिक सशक्तिकरण का राष्ट्रीय अभियान है। उद्देश्य कौशल विकास कराना है। रोजगार के अवसर देना है। स्वरोजगार के लिए तैयार करना है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। गरिमापूर्ण जीवन की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि इस पहल का विस्तार देश के हर जिले और गांव तक किया जाएगा। ज्यादा से ज्यादा महिलाएं प्रशिक्षण लें। आर्थिक रूप से सशक्त बनें। पाठक ने बताया कि जनवरी 2026 में अलवर में हुए पहले नई दिशा मेले की सफलता से यह साबित हुआ। अवसर मिले। प्रशिक्षण मिले। महिलाएं अपना जीवन बदलती हैं। समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बनती हैं। उन्होंने कहा कि नई दिशा केंद्रों पर ब्यूटी पार्लर, सिलाई-कढ़ाई, पापड़-अचार निर्माण, साड़ियों से झोले बनाने जैसे रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। पद्मश्री उषा चोमर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सही अवसर मिले। सहयोग मिले। महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं। नित्या पाठक ने कहा कि सुलभ इंटरनेशनल ने देशभर में करीब दो लाख महिलाओं को मैला ढोने जैसी अमानवीय प्रथा से मुक्ति दिलाई है। उन्हें सम्मानजनक जीवन दिया है। रोजगार उपलब्ध कराया है। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत बिहार से हुई। संस्थापक डॉ. विंदेश्वर पाठक के जरिए 2003 में शुरू नई दिशा आज महिलाओं के जीवन में बदलाव का प्रभावी माध्यम बन चुकी है।