खेती में मौसम की अनिश्चितता से फसल को बचाने व किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए उद्यान विभाग ने नई पहल शुरू की है। राज्य योजना के तहत अब किसानों को लो-टनल तकनीक अपनाने का मौका मिलेगा। इसके लिए उदयपुर जिले के 4 ब्लॉक में 12 हजार वर्गमीटर का लक्ष्य तय किया है। विभाग ने किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए आवंटित लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए हैं। लो-टनल में फसल को जमीन के ऊपर तैयार एक सुरंगनुमा संरचना से ढंककर उगाया जाता है। इससे फसल को प्रतिकूल मौसम की स्थिति से बचाने और नियंत्रित वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। खासकर सब्जियों और नाजुक फसलों की शुरुआती अवस्था में यह तकनीक उपयोगी हो सकती है। 4.80 लाख रुपए का बजट आवंटित उद्यान विभाग के अनुसार गिर्वा, मावली, बड़गांव और खेरवाड़ा के कृषि पर्यवेक्षक उद्यानों को लो-टनल के लक्ष्य दिए हैं। चारों ब्लॉक में 3-3 हजार वर्गमीटर, यानी कुल 12 हजार वर्गमीटर का लक्ष्य है। इसके लिए 4.80 लाख रुपए का बजट आवंटित किया गया है। योजना में अलग-अलग श्रेणी के किसानों के लिए भी लक्ष्य तय किया गया है। कुल 12 हजार वर्गमीटर में से 8 हजार वर्गमीटर सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए रखा गया है। इसमें चारों ब्लॉक में 2-2 हजार वर्गमीटर का लक्ष्य है। वहीं अनुसूचित जाति के किसानों के लिए 4 हजार वर्गमीटर का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें प्रत्येक ब्लॉक में 1-1 हजार वर्गमीटर शामिल है। उत्पादकता-आय बढ़ेगी उप निदेशक उद्यान (उदयपुर) डॉ. हरि सिंह राठौड़ ने बताया कि लो-टनल तकनीक किसानों के लिए खेती में बदलाव का माध्यम बन सकती है। इससे अगेती फसलें ले सकते हैं, जिससे जल्दी बाजार में फसल आने से ज्यादा दाम मिलते हैं। लो-टनल से पौधों को प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाया जाता है। इससे फसल की शुरुआती वृद्धि के दौरान तापमान-नमी जैसी परिस्थितियों को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिल सकती है। विभाग का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर फसल उत्पादकता और आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है।