सीकर के फतेहपुर शेखावाटी कस्बे में दो सांडों के हमले में रिटायर्ड कर्मचारी घायल हो गए। वे अपने घर के बाहर झाडू लगा रहे थे। इस दौरान पीछे दो सांड एक-दूसरे के पीछे भागते हुए आए और बुजुर्ग को गिरा दिया। हमले का वीडियो भी सामने आया है। घायल को उपजिला हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है। हमले के बाद से कस्बे के लोगों में डर है। दो दिन पहले सीकर के उद्योग नगर थाना क्षेत्र में भी सांड के हमले में रेस्टोरेंट संचालक जितेश की मौत हो गई थी। जिले की बात करें तो पिछले 2 साल में आवारा पशुओं के कारण 18 लोगों की मौत हो चुकी है। रिटायर्ड कर्मचारी के चिल्लाने पर आए परिजन हमले में घायल रिटायर्ड कर्मचारी प्रेम प्रकाश है। वे चमड़ियां दवा खाने के पास अपने घर के सामने सफाई कर रहे थे। इस दौरान सांडों के हमले में घायल हो गए। बुजुर्ग के चिल्लाने पर परिवार और पड़ोस के लोग पहुंचे। बुजुर्ग को हॉस्पिटल लेकर गए, जहां उनका इलाज चल रहा है। हमले में उन्हें काफी चोट आई है। एक-दूसरे के पीछे भागते हुए आए सांड गली में लगे सीसीटीवी में घटना कैद हो गई। वीडियो में बुजुर्ग झाडू लगाते नजर आए है। पीछे से दो सांड भागते हुए आए और बुजुर्ग को टक्कर मार दी। बुजुर्ग सड़क पर गिर गए। इसके बाद तीसरा सांड भी आए। हमले के बाद लोगों में गुस्सा सांडों के हमले के बाद से लोगों में गुस्सा है। लोगों का कहना है कि सड़क पर अवारा पशु घूमते रहते है और लोगों पर हमला करते है। इसके बाद भी अवारा पशुओं को गोशालाओं में नहीं ले जाया जाता। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि गोवंश को चारा और रोटियां खिलाने के लिए सड़कों और डिवाइडरों पर डाल देते हैं। इसके चलते गोवंश एक ही स्थान पर एकत्रित हो जाता है और दिनभर सड़कों पर घूमते रहते है। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ ही राहगीरों पर हमले का खतरा भी बना रहता है। सीकर जिले में 2 साल में आवारा पशुओं के कारण 18 मौत नगर परिषद के खिलाफ कर सकते हैं मुकदमा? सवाल- क्या आवारा पशुओं से मुक्त सड़क हमारा अधिकार है?
जवाब- संविधान का अनुच्छेद 21 हमें सुरक्षित जीवन का अधिकार देता है। नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 104 के तहत सार्वजनिक मार्गों से खतरनाक वस्तुओं और आवारा पशुओं को हटाना स्थानीय निकाय का दायित्व है। सवाल- क्या नगर परिषद पर केस दर्ज हो सकता है?
जवाब- निकाय प्रशासन को शिकायत के बावजूद आवारा मवेशियों को सड़कों से नहीं हटाया जाता और किसी नागरिक की जान जाती है, तो इसे घोर लापरवाही मानते हुए संबंधित अफसरों के खिलाफ एफआईआर या कोर्ट में इस्तगासा दायर किया जा सकता है। सवाल-नागरिक इस संबंध में दावा कैसे कर सकते हैं?
जवाब-पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तथा गुजरात हाईकोर्ट ने फैसलों में स्पष्ट किया है कि आवारा पशुओं (कुत्तों या सांडों) के हमले में मौत या गंभीर चोट की सीधी वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही संबंधित निकाय या राज्य सरकार की होती है। कोर्ट ने आवारा पशु के हमले से मौत के मामलों में स्थानीय निकायों को पीड़ित परिवार को 5 लाख से 10 लाख तक का अंतरिम मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। सवाल- मुआवजा पाने के रास्ते क्या हैं?
जवाब- पीड़ित परिवार हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर निकाय की विफलता के आधार पर मुआवजा मांग सकता है। मानवाधिकार आयोग में शिकायत दी जा सकती है। आयोग निकाय की लापरवाही को मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हुए सरकार को मुआवजा देने की सिफारिश करता है। जिला कलेक्टर के माध्यम से आकस्मिक दुर्घटना राहत कोष अथवा मुख्यमंत्री सहायता कोष से आर्थिक संबल के लिए आवेदन किया जा सकता है।
( दीपक चौहान, हाईकोर्ट एडवोकेट) --- ये खबर भी पढ़िए- सीकर में सांड के हमले में रेस्टोरेंट संचालक की मौत:फेफड़ा बाहर आया; स्कूटी से घर जा रहा था, मौके पर हुई मौत सीकर शहर में सांड के हमले में रेस्टोरेंट संचालक की मौत हो गई। संचालक अपने रेस्टोरेंट से घर जा रहा था। (पढ़िए पूरी खबर)