प्रशासनिक फाइलों से निकलकर जिले के जर्जरहाल अस्पतालों की मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम धरातल पर तो आना शुरू हो चुका है, लेकिन सच ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों और चिकित्सा स्टाफ को इस बार मानसून के बीच जान जोखिम में डालकर ही दिन काटने पड़ेंगे। हाल ही अलवर के काला कुआं सैटेलाइट अस्पताल में ओपीडी के दौरान छत का प्लास्टर और पंखा भरभरा कर गिरने से एक डॉक्टर और महिला मरीज गंभीर घायल हो गए। इस हादसे के बाद दैनिक भास्कर ने उदयपुर की स्वास्थ्य सुविधाओं की पड़ताल की तो डराने वाले तथ्य मिले। सामने आया कि सीएमएचओ प्रथम के अंतर्गत 8 सब-सेंटर सहित छाणी, कोल्यारी और कल्याणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के भवन इस कदर जर्जर थे कि उन्हें पूरी तरह कंडम घोषित करना पड़ा है। इनमें से छाणी और कोल्यारी में पुराने भवनों को पूरी तरह गिराकर नया बनाने के लिए दो करोड़ रुपए की स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू भी हो चुका है। कल्याणपुर पीएचसी का भवन भी नया बनेगा। दूसरी ओर सीएमएचओ द्वितीय के अंतर्गत घासा पीएचसी को भी डिसमेंटल (कंडम) करने की मंजूरी मिल चुकी है और वहां भी नया ढांचा खड़ा किया जा रहा है। इसके साथ ही गोगुंदा में 42 करोड़ की लागत से बनने वाले नए उप जिला चिकित्सालय के लिए 9 बीघा जमीन आवंटित कर दी गई है। वैकल्पिक भवनों में चलेगी व्यवस्था, मरीजों की बढ़ेगी आफत तकनीकी रूप से बड़ी चुनौती यह है कि जिन 12 अस्पतालों के भवन पूरी तरह कबाड़ हो चुके हैं, वहां निर्माण चलने के दौरान उपचार और डॉक्टर के बैठने की व्यवस्था अस्थायी तौर पर आसपास के सरकारी भवनों या कमरों में शिफ्ट की जाएगी। ऐसे में नए ब्लॉक और इमारतें खड़ी होने तक ग्रामीण इलाकों के हजारों जरूरतमंद मरीजों को अस्थायी और सीमित जगहों में इलाज कराने के लिए भारी परेशानी और अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा। सभी हॉस्पिटलों में सर्वे करवाने के बाद जर्जर स्थितियों को सुधारने का कार्य शुरू कर दिया गया है। जो भवन पूरी तरह कंडम हैं, उनके नए प्रस्ताव भेज दिए गए हैं और काम प्रगति पर है। -डॉ. अशोक आदित्य, सीएमएचओ-प्रथम जिन अस्पतालों की स्थिति खराब थी, वहां मरम्मत कार्य शुरू करवा रहे हैं। सभी बीसीएमओ को निर्देश दिया है कि किसी भी अन्य जर्जर भवन की सूचना मुख्यालय भेजें। -डॉ. ओपी रायपुरिया, सीएमएचओ-द्वितीय