राजस्थान के असंगठित क्षेत्र में जयपुर उद्यम और रोजगार, दोनों के लिहाज से सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय की जिला स्तरीय रिपोर्ट के मुताबिक, असंगठित उद्यमों की संख्या में जयपुर देश में 18वें और कामगारों की संख्या में 11वें स्थान पर है। जयपुर में 4,84,873 असंगठित उद्यम हैं, जिनमें करीब 10,15,884 लोगों को काम मिल रहा है। प्रदेश में चूरू 3,18,817 उद्यम और 6,31,828 कामगारों के साथ दूसरे स्थान पर है। बीकानेर में 1,80,041 उद्यम और 3,10,363 कामगार हैं, जबकि सीकर में उद्यमों की संख्या 1,73,082 है, लेकिन यहां 3,27,999 लोगों को रोजगार मिल रहा है। यानी उद्यमों की संख्या बीकानेर में ज्यादा है, जबकि कामगारों के मामले में सीकर आगे है। त्योहारी खरीदारी बढ़ने के साथ खुदरा कारोबार, सेवा और छोटे विनिर्माण से जुड़े उद्यमों को मांग बढ़ने की उम्मीद है। महिला कामगारों की हिस्सेदारी में जयपुर 477वें स्थान पर, प्रदेश में झुंझुनूं अव्वल जयपुर में रत्न-आभूषण और शादी-ब्याह की खरीदारी। उदयपुर; 1,54,460 उद्यम और 3,06,916 कामगारों के साथ प्रमुख जिलों में शामिल। देश में पश्चिम बंगाल का नॉर्थ 24 परगना 16,59,626 उद्यमों और 21,25,162 कामगारों के साथ दोनों संकेतकों में पहले स्थान पर है। प्रदेश की 37.11 फीसदी महिला उद्यमी झुंझुनूं में महिला स्वामित्व वाले प्रोपराइटरी उद्यमों की हिस्सेदारी में झुंझुनूं 37.11% के साथ प्रदेश में सबसे आगे है। जयपुर में 24.87% है। नीमकाथाना के उद्यमों में ज्यादा बाहरी कामगार: - नीमकाथाना में हायर वर्कर एस्टेब्लिशमेंट्स की हिस्सेदारी 24% है। जयपुर में इनकी हिस्सेदारी 20.71%, जोधपुर में 20.01% और कोटा में 12.93% है। जयपुर में प्रति उद्यम सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) 4,67,577 रुपए और प्रति कामगार जीवीए 2,23,170 रुपए दर्ज किया गया है। छोटे कारोबार को वित्त और बाजार से जोड़ना जरूरी असंगठित क्षेत्र स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार का आधार है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से छोटे कारोबारियों के लिए बिक्री बढ़ाने के अवसर बनेंगे। छोटे कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने के साथ कौशल विकास और उत्पादों की ब्रांडिंग पर ध्यान दिया जाए तो उनकी आय और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है। डॉ. विजय बासोतिया, नेशनल प्रेसिडेंट, वीआईसीसीआई