नगर परिषद क्षेत्र के शहर स्थित महावीर भवन में धर्म ध्यान की सरिता बह रही है। दर्शनार्थी श्री संघों का आवागमन जारी है। ज्ञाताधर्मकथागं व उत्तराध्ययन सूत्र आगम आधारित प्रवचन चल रहे हैं। धर्म सभा में यशवन्त मुनि ने कहा कि क्षमा से धर्म की शुरुआत करना है। गुण की शोभा ज्ञान और क्षमा है। क्षमा मनुष्य का सर्वोत्तम आभूषण है। क्षमा धर्म प्रधान है। ठाणांग सूत्र में भगवान महावीर ने कहा है कि जीव को दुख का भय है। संसार के सभी जीव सुख चाहते हैं। स्वीकार्यता आने पर प्रेमभाव स्वत:आ जाता है। अशोक मुनि ने कहा कि संयम को अपनाने वाले महान आत्मा में मृदुला, गम्भीरता, चित्त में सदैव प्रसन्नता, शील सम्पन्नता आदि गुण अनिवार्य हैं। मोह कम करने का भाव रखना है। इस दौरान शाखा मन्त्री मुकेश जैन ने अलीगढ़ संघ, वीर परिवार शान्ति लाल जैन, नरेन्द्रमोहन जैन, मेघराज जैन, नरेश जैन व अतिथि श्रावक श्राविकाओं का अभिनन्दन किया।